Vaishakh Purnima 2026: आज मनाया जा रहा है वैशाख पूर्णिमा का पर्व, जानें स्नान-ध्यान और पूजा का शुभ मुहूर्त
TV9 Bharatvarsh May 01, 2026 10:42 AM

Vaishakh Purnima Benefits: वैशाख पूर्णिमा का पावन पर्व आज यानी शुक्रवार को मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की इस पूर्णिमा तिथि का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि इसी दिन बुद्ध पूर्णिमा भी मनाई जाती है. यह समय आत्म-शुद्धि और ईश्वर की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है. शास्त्रों में उल्लेख है कि वैशाख पूर्णिमा पर किए गए धार्मिक कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं और जीवन के कष्टों को कम करते हैं. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान देने से मन की नकारात्मकता दूर होती है. जब हम सही समय पर पूजा और पाठ का संकल्प लेते हैं, तो हमारे भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है.

स्नान और पूजा के लिए शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त स्नान: स्नान और दान का पुण्य पाने के लिए सुबह 04:15 बजे से सुबह 04:58 बजे तक का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया.

अभिजित मुहूर्त पूजा: भगवान विष्णु की विशेष पूजा और कथा के लिए सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक का समय शुभ है.

तिथि प्रारंभ: पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल, 2026 को रात 09:12 बजे से हुई है.

तिथि समाप्ति: इस पावन तिथि का समापन 1 मई, 2026 को रात 10:52 बजे होगा.

चंद्रोदय समय: शाम को चंद्र देव के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने का समय 06:52 बजे रहेगा.

चंद्र दर्शन और अर्घ्य के लिए शाम का विशेष समय

पूर्णिमा की तिथि पर चंद्रमा अपनी पूरी शक्ति में होता है, इसलिए शाम के समय चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देना जीवन में सुखद बदलाव लेकर आता है. ज्योतिष के अनुसार चांदी के पात्र में शुद्ध जल, दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली के चंद्र दोष दूर होते हैं और मन का भारीपन कम होता है. इस दौरान की गई साधना से एकाग्रता बढ़ती है और दिमागी सुकून मिलता है. रात के समय खुले आसमान के नीचे कुछ पल बिताना और शांत मन से ध्यान लगाना आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा रहता है. चंद्रमा की शीतल किरणें सीधे शरीर पर पड़ने से बेचैनी दूर होती है और स्वभाव में धैर्य का संचार होता है.

दान और सेवा का विशेष महत्व

वैशाख मास में सूर्य का ताप अपने चरम पर होता है, इसलिए इस पावन तिथि पर दान का महत्व और भी बढ़ जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस तपन भरे मौसम में जल का दान करना सबसे बड़ा और उत्तम कर्म माना गया है. वैशाख पूर्णिमा के दिन राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, उन्हें ठंडा पानी पिलाना या किसी मंदिर में मिट्टी के घड़े का दान करना सीधे भगवान विष्णु की सेवा करने के समान है. इसके अलावा जरूरतमंदों को पंखा, खरबूजा या सत्तू का दान करना भी अच्छे फल प्रदान करता है. जब हम निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, तो हमारे पुराने दोष मिटने लगते हैं और घर में सुख-शांति का संचार होता है. यह परोपकार ही हमारे जीवन को खुशहाल बनाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. TV9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिएastropatri.comपर संपर्क करें.

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