मिजोरम में आखिरी विद्रोही गुट ने जोड़े हाथ, राज्य में खत्म हुआ डर और बंदूक का साया!
TV9 Bharatvarsh May 01, 2026 11:42 AM

मिजोरम के आखिरी बचे हुए जातीय विद्रोही समूह ने गुरुवार को अपने हथियार सौंप दिए. मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बताया कि इसके साथ ही राज्य विद्रोह-मुक्त हो गया. अधिकारियों के मुताबिक, ये समूह कई सालों से निष्क्रिय था, फिर भी लालमिंगथांगा सनाते के नेतृत्व वाले ‘हमार पीपल्स कन्वेंशन (डेमोक्रेटिक)’ या HPC(D) के एक गुट ने रुक-रुककर छिटपुट आपराधिक गतिविधियां जारी रखी थीं. सनाते गुट को इस पूर्वोत्तर राज्य का आखिरी बचा हुआ विद्रोही समूह माना जाता था.

HPC(D) संविधान की छठी अनुसूची के तहत हमार समुदाय के लोगों के लिए एक स्वायत्त जिला परिषद की मांग कर रहा था. दिन के दौरान आइजोल के पास सेसावंग में आयोजित ‘घर ​​वापसी और हथियार सौंपने के समारोह’ में सनाते सहित इस समूह के कुल 43 सदस्यों ने सरकार के सामने अपने हथियार डाल दिए. यह ‘घर वापसी समारोह’ मिजोरम सरकार और HPC(D) के बीच 14 अप्रैल को हुए शांति समझौते के बाद आयोजित किया गया. ये प्रभावी रूप से राज्य में उग्रवाद को खत्म करने के तौर पर देखा जा रहा है.

‘मिजोरम सचमुच एक शांतिपूर्ण राज्य’

इस कार्यक्रम में बोलते हुए लालदुहोमा ने कहा कि अतीत में जब भी मिजोरम में शांति की बात होती थी, तो HPC(D) विद्रोह का साया हमेशा मन में बना रहता था. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसी समझौते पर पहुंचने के लिए खुले दिल से बातचीत के लिए आगे आए. हमारे गृह मंत्री और उनके सहयोगियों ने बहुत मेहनत की. उन्होंने कहा कि आज हम अपने लक्ष्य तक पहुंच गए हैं. अब, शांत मन से हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि मिजोरम सचमुच एक शांतिपूर्ण राज्य है.

कई मिजो जनजातियों से फिर से एकजुट होने का आग्रह करते हुए, लालदुहोमा ने कहा कि कोई भी एक जनजाति ‘मिजो’ होने की पहचान से ऊपर नहीं है. उन्होंने कहा कि हम सभी मिजो हैं. अगर मिजो समुदाय के भीतर की उप-जनजातियां आज पूरी तरह से अपने दम पर खड़े होने की कोशिश करती हैं, तो उनके सफल होने की संभावना कम ही है. हमें अपनी साझा मिजो पहचान में ही संतोष ढूंढ़ना चाहिए. हम केवल एकता के जरिए ही आगे बढ़ सकते हैं.

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