सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी अग्रिम जमानत, असम के मुख्यमंत्री के 'पेड़ा बना दूंगा' जैसे बयानों को बनाया आधार
निपुण सहगल May 02, 2026 01:12 AM

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है. असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के बारे में लगाए गए आरोपों को लेकर गुवाहाटी में दर्ज केस में उन्हें यह राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा से जांच में सहयोग को कहा है. कोर्ट ने माना है कि खेड़ा के आरोप और उन पर दर्ज मुकदमा, दोनों ही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का नतीजा लगते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उन बयानों को भी दर्ज किया है जो उन्होंने खेड़ा को लेकर दिए हैं. ध्यान रहे कि सरमा ने 'पवन खेड़ा को पवन पेड़ा बना दूंगा', 'अगर दोबारा मेरी सरकार बनी तो पवन खेड़ा जिंदगी के आखिरी दिन तक असम की जेल में रहेगा' जैसे कई बयान दिए थे. पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बताते हुए कोर्ट ने इन बयानों को भी आधार बनाया है.

जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने मामले से जुड़ी सभी घटनाओं को भी आदेश में दर्ज किया है. इनमें खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस, उनकी तरफ से सीएम की पत्नी पर 3 देशों का पासपोर्ट और विदेशी अकाउंट रखने का आरोप लगाने, गुवाहाटी में खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और दिल्ली में उनके घर पर असम पुलिस के पहुंचने जैसी तमाम बातें शामिल हैं.

मामले की सुनवाई के दौरान खेड़ा की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उनकी गिरफ्तारी को गैरजरूरी बताया था. सिंघवी ने कहा था कि हिरासत में लेने का इकलौता उद्देश्य खेड़ा को अपमानित करना है. वहीं असम पुलिस की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह सिर्फ मानहानि का मामला नहीं है. सरकारी दस्तावेजों को फर्जी तरीके से बनाना बीएनएस की धारा 337, 338 और 339 के तहत गंभीर अपराध है. खेड़ा को हिरासत में लेकर उनसे यह जानकारी निकालना जरूरी है कि उन्होंने यह फर्जी दस्तावेज कहां से हासिल किए.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में माना है कि खेड़ा ने दस्तावेजों के फर्जी होने की बात का अपनी याचिका में कोई विरोध नहीं किया है लेकिन साथ ही कोर्ट ने खेड़ा की तरफ से जताई गई इस आशंका को भी सही माना है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में कोर्ट ने खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत दे दी है. कोर्ट ने उनसे जांच में पूरी तरह सहयोग करने, मामले के सबूतों को प्रभावित न करने और बिना निचली अदालत की अनुमति लिए विदेश न जाने को कहा है.

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