प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को वाराणसी में थे. इस दौरान वह सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचे थे. कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर को लेकर निशाना साधा गया है कि प्रधानमंत्री मंदिर प्रांगण में जूता पहन कर पहुंचे थे. इसलिए काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में किन जगहों पर जूता चप्पल के साथ प्रवेश निषेध है, यह जानना महत्वपूर्ण है.
कहां तक चप्पल-जूता पहन जा सकते हैं?
काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए अलग-अलग द्वार हैं. पूरे मंदिर परिसर की बात कर लें तो मंदिर के गर्भ गृह में अलग-अलग प्रवेश द्वार से श्रद्धालु जब प्रवेश करते हैं तो उनके हाथ में बाबा को चढ़ाए जाने वाला पुष्प और प्रसाद भी होता है. वैसे श्रद्धालु शंकराचार्य चौक क्षेत्र तक चप्पल जूता पहन कर जा सकते हैं. वहां पर ही इसे रखने की व्यवस्था तय की गई है.
जानें क्या हैं नियम कानून?
जब श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह के ठीक बाहर वाले क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो वहां किसी का भी चप्पल जूता पहन कर जाना प्रतिबंधित है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने भी काशी विश्वनाथ धाम के नियमों का पालन करते हुए मंदिर के मुख्य क्षेत्र से बाहर ही जूता निकाल दिया था. हालांकि जब वह शंकराचार्य चौक से ललिता घाट की तरफ जा रहे थे, जहां जूता चप्पल पहन कर जाने पर कोई रोक नहीं है तो उसी दौरान उन्होंने कुछ बच्चों से मुलाकात की. वो बच्चे अपने परिवार के साथ बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह की तरफ जा रहे थे. ऐसे में स्वाभाविक है कि वो बच्चे नंगे पैर ही दर्शन करने के लिए जाएंगे. इन सब बातों से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी दूसरी दिशा की तरफ जा रहे थे, जबकि बच्चे मंदिर के गर्भगृह की तरफ.
सुप्रिया श्रीनेत से लेकर जीतू पटवारी तक ने साधा निशाना
काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर को साझा करते हुए कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने निशाना साधते हुए कहा है कि बच्चों ने बिना चप्पल जूता के मंदिर परिसर में दर्शन किया, लेकिन प्रधानमंत्री जूते पहनकर मंदिर प्रांगण में टहल रहे थे.