First Journalist of Universe: नारद जयंती का पावन पर्व आज यानी शनिवार को मनाया जा रहा है. सनातन धर्म में देवर्षि नारद सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं. वे भगवान विष्णु के परम भक्त और ब्रह्मांड के पहले संदेशवाहक के रूप में पूजा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास की प्रतिपदा तिथि को ही नारद मुनि का अवतरण हुआ था. वे केवल एक ऋषि ही नहीं, बल्कि संगीत, ज्ञान और भक्ति के भी महान ज्ञाता माने जाते हैं. नारद मुनि की वीणा से निकलने वाले ‘नारायण-नारायण’ के जप से तीनों लोकों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह पावन दिन हमें यह याद दिलाता है कि बिना किसी भेदभाव के सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए ईश्वर की भक्ति करना ही जीवन का असली फल है.
देवर्षि नारद को क्यों कहा गया देवताओं का दूत?नारद मुनि को देवताओं का दूत इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे सभी लोकों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करने का कार्य करते थे. पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि वे बिना किसी रोक-टोक के स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक की यात्रा कर सकते थे. उनका मुख्य कार्य देवताओं, मनुष्यों और यहां तक कि दानवों तक भी भगवान की योजनाओं को पहुंचाना था. हालांकि, कई बार उनकी बातें सुनने में विवाद पैदा करने वाली लगती थीं, लेकिन अंत में उनका परिणाम हमेशा जगत के कल्याण के लिए ही होता था. उन्होंने हमेशा धर्म की स्थापना के लिए कड़वे सच बोले, जिससे अधर्म का नाश हुआ और सत्य की जीत हुई. उनकी बुद्धि और सूचना तंत्र के कारण ही उन्हें ब्रह्मांड का पहला पत्रकार भी माना जाता है.
भगवान विष्णु के अनन्य भक्त और संगीत के स्वामीदेवर्षि नारद का पूरा जीवन भगवान विष्णु की भक्ति में समर्पित रहा है. उनके हाथ में हमेशा ‘महती’ नाम की वीणा रहती है, जिससे वे निरंतर हरि नाम का कीर्तन करते रहते हैं. वे केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि गंधर्व कला और संगीत शास्त्र के भी आदि गुरु माने जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार, नारद मुनि ने ही महान ऋषि वाल्मीकि को रामायण लिखने की प्रेरणा दी थी और वेद व्यास जी को श्रीमद्भागवत पुराण की रचना के लिए मार्ग दिखाया था. वे ज्ञान के इतने बड़े सागर हैं कि उनकी उपस्थिति मात्र से ही बड़े-बड़े ऋषियों के संशय दूर हो जाते थे. उनका यह स्वरूप हमें सिखाता है कि संगीत और कला का सही उपयोग केवल ईश्वर की निकटता प्राप्त करने के लिए ही होना चाहिए.
ब्रह्मांड के पहले पत्रकार: देवर्षि नारददेवर्षि नारद को ब्रह्मांड का पहला पत्रकार भी माना जाता है. आज के समय के पत्रकारों की तरह ही वे सूचनाओं को एक लोक से दूसरे लोक तक पहुंचाने का कार्य करते थे. उनका मुख्य उद्देश्य कभी किसी का बुरा करना या व्यक्तिगत लाभ उठाना नहीं था, बल्कि संसार में संतुलन बनाए रखना और धर्म की रक्षा करना था. नारद मुनि का यह स्वरूप आज की पीढ़ी के लिए बहुत दिलचस्प है क्योंकि वे दिखाते हैं कि सही सूचना और संवाद के माध्यम से बड़े से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं. उनका ‘इधर की बात उधर’ करना असल में किसी बड़े असुर के अंत या संसार के भले के लिए उठाया गया एक सोची-समझी योजना का हिस्सा होता था. उन्होंने अपनी चतुर बुद्धि और सटीक जानकारी से हमेशा सत्य और न्याय का साथ दिया.
ये भी पढ़ें- आज मंगल होंगे उदय, बिगड़े काम फिर बनेंगे- जानें किस राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. TV9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी प्रकार के सुझाव के लिए astropatri.comपर संपर्क करें.