12वीं कक्षा के बाद कॉमर्स स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए सही करियर का चुनाव करना एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है. करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा जो करियर गाइडेंस इंडिया की संस्थापक हैं वो बताती हैं कि आजकल विकल्पों की भारी संख्या के कारण छात्रों में भ्रम और अनिश्चितता बढ़ गई है. पारंपरिक करियर जैसे चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) के अलावा कई नए और उभरते हुए विकल्प भी उपलब्ध हैं जिनके बारे में गहरी समझ होना आवश्यक है.
सही कोर्स चुनने के लिए महत्वपूर्ण बातेंछात्रों को कोर्स चुनते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए. परवीन मल्होत्रा अपनी पसंद के कॉलेज के बजाय अपनी पसंद के कोर्स को प्राथमिकता देने की सलाह देती हैं. उनका मानना है कि ग्रेजुएशन एक हाइजीन फैक्टर है, यानी यह एक बुनियादी योग्यता है जो अब हर छात्र के लिए आवश्यक है. हालांकि, सिर्फ डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है. छात्रों को तीन से चार साल के स्नातक जीवन का उपयोग अपनी रुचियों को तलाशने, दुनिया को समझने और विभिन्न कौशल विकसित करने में करना चाहिए.
रुचि और स्किल डेवलपमेंट का महत्वकरियर काउंसलर जोर देती हैं कि छात्र अपनी रुचि और व्यक्तित्व के अनुसार कोर्स का चुनाव करें. ऐसा करियर चुनना महत्वपूर्ण है जिसमें उन्हें मजा आए, क्योंकि आजकल की नौकरियां 9 से 5 बजे तक सीमित नहीं हैं. हॉट करियर के पीछे भागने के बजाय छात्रों को ऐसे स्किल सीखने पर ध्यान देना चाहिए जो भविष्य में प्रासंगिक रहें. एआई और डिजिटल युग में छोटे-छोटे प्रोफेशनल या स्किल-आधारित कोर्स करना बहुत फायदेमंद हो सकता है. इससे छात्र को यह समझने में मदद मिलती है कि क्या कोई विशेष क्षेत्र उसके लिए उपयुक्त है.
रिजल्ट के बाद और भविष्य के लिए तैयारीजिन छात्रों के रिजल्ट आ चुके हैं और वो अभी भी अनिश्चित हैं, उन्हें घबराना नहीं चाहिए. परवीन मल्होत्रा उन्हें बी.कॉम जैसे सुरक्षित ग्रेजुएट कोर्स को चुनने और साथ ही अपनी रुचियों का पता लगाने के लिए समय का सदुपयोग करने की सलाह देती हैं. इसके साथ ही, मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (MOOCs) जैसे कोर्सएरा (Coursera) और लिंक्डइन लर्निंग (LinkedIn Learning) पर उपलब्ध छोटे कोर्स करके नए विषयों की नॉलेज प्राप्त की जा सकती है. ये कोर्स अक्सर टॉप विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों द्वारा पढ़ाए जाते हैं और बहुत किफायती होते हैं.