आंध्र प्रदेश में तिरुपति मंदिर के लड्डू को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. सरकार की तरफ से बनाई गई एक सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने लड्डू बनाने के लिए 70 लाख किलो से ज्यादा घी खरीदा, लेकिन इसमें जरूरी गुणवत्ता जांच नहीं की गई.
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में अधिकारियों ने यह तय किया था कि घी की जांच के लिए FSSAI का जरूरी β-सिटोस्टेरॉल टेस्ट किया जाएगा, जो 1 जुलाई 2022 से अनिवार्य है. लेकिन बाद में इस फैसले को बदल दिया गया और सप्लायर को बिना इस जांच के ही घी सप्लाई करने की छूट दे दी गई. इसका नतीजा यह हुआ कि बड़ी मात्रा में घी बिना सही जांच के खरीदा गया.
जांच में यह भी सामने आया कि सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर सप्लायर ने मिलावटी घी की सप्लाई की. अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने जरूरी सेफ्टी टेस्ट को नजरअंदाज किया और ऐसी लैब रिपोर्ट को दबा दिया जिसमें घी में मिलावट की पुष्टि हुई थी.
रिपोर्ट में बताया गया है कि खरीद प्रक्रिया में भी कई गड़बड़ियां हुईं. टेंडर के नियमों को ठीक से लागू नहीं किया गया और धीरे-धीरे गुणवत्ता जांच से जुड़े जरूरी नियम हटा दिए गए. खरीद समिति के कुछ सदस्यों ने पूरी मंजूरी के बिना ही नियमों में ढील दे दी. इसके अलावा, बहुत कम कीमत वाली बोलियों को बिना ठीक से जांचे किए बिना रख लिया गया.
घी की कीमत में प्रति किलो 207 रुपये तक की भारी कटौती
जांच में यह भी पाया गया कि 2019 में बनाए गए सख्त नियमों को कुछ ही महीनों में कमजोर कर दिया गया. इससे ऐसी कंपनियों को भी घी सप्लाई करने का मौका मिल गया, जिनकी उत्पादन क्षमता सही तरीके से साबित नहीं हुई थी. फिर भी इन कंपनियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ सप्लायर ने घी की कीमत में प्रति किलो 207 रुपये तक की भारी कटौती की और नीलामी के बाद भी दाम को लेकर बातचीत की, जो नियमों के खिलाफ है. सबसे कम बोली (L1) पर ज्यादा भरोसा करने की वजह से कई अयोग्य कंपनियों को भी ठेका मिल गया.
TTD की लैब में घी मिलावट की जांच
एक और बड़ी कमी यह सामने आई कि TTD की लैब में घी की मिलावट जांचने के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण नहीं थे. लैब को अपग्रेड करने की जरूरत लंबे समय से थी, लेकिन इसमें करीब तीन साल की देरी हुई. रिपोर्ट में कुछ कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं. इनमें प्रीमियर एग्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड को मिलावट की पुष्टि होने के बाद भी नए ऑर्डर दिए जाते रहे. वहीं एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसने गलत उत्पादन और सर्टिफिकेट से जुड़ी जानकारी दी, फिर भी उसे सप्लाई चेन में बने रहने दिया गया.
प्रशासनिक लापरवाही आई सामने
जांच समिति ने इस पूरे मामले के लिए TTD बोर्ड, खरीद समिति के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों और डेयरी विशेषज्ञों को जिम्मेदार ठहराया है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और गलत कंपनियों से लगातार खरीद की वजह से यह पूरी स्थिति बनी.