दिल्ली की साकेत कोर्ट से अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी की रेगुलर जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय की जांच चल रही है. एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी प्रधान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया.
ईडी ने कोर्ट में जमानत अर्जी का किया था कड़ा विरोध
साकेत कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED ने जमानत का कड़ा विरोध किया और कहा कि आरोप काफी गंभीर हैं और जांच अभी अहम दौर में है. इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए. जवाद सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने फरीदाबाद स्थित अपने शैक्षणिक संस्थान में छात्रों से ली गई फीस के जरिए अवैध फंड जुटाया. साथ ही संस्थान की मान्यता और पहचान को लेकर गलत जानकारी देने के भी आरोप हैं.
नवंबर 2025 में गिरफ्तार हुए थे जवाद सिद्दीकी
ED के मुताबिक यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से किया गया आर्थिक अपराध है. अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन को नवंबर 2025 में ED ने गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं.
इस मामले में ED पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भी उनके खिलाफ अलग से चार्जशीट दायर की है. एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बताया कि सिद्दीकी के खिलाफ एक और मनी लॉन्ड्रिंग जांच चल रही है, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है.
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ट्रायल कोर्ट ने मानवीय आधार पर पहले दी थी जमानत
इससे पहले 7 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने मानवीय आधार पर सिद्दीकी को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी ताकि वह अपनी कैंसर से जूझ रही पत्नी की देखभाल कर सकें. हालांकि ED ने इस राहत को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी जिसके बाद मामले पर फिर से सुनवाई हुई.
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