Thalapathy Vijay का जलवा! क्या 'थलापति' भी बनेंगे तमिलनाडु के CM? जानें उन 4 सितारों के बारे में जिन्होंने सिनेमा के बाद राजनीति में गाड़े झंडे
UPUKLive Hindi May 04, 2026 03:43 PM

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा का रिश्ता बेहद पुराना और गहरा है। यहां बड़े पर्दे के सुपरस्टार्स का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना कोई नई बात नहीं है। अब सबकी नजरें सुपरस्टार विजय पर टिकी हैं। क्या विजय भी एमजीआर और जयललिता जैसा इतिहास दोहरा पाएंगे? विजय से पहले 4 ऐसे दिग्गज रहे हैं जिन्होंने अपनी फिल्मी चमक को सियासी ताकत में बदल दिया और सचिवालय तक का सफर तय किया।

सी. एन. अन्नादुरई: पटकथा लेखक से पहले मुख्यमंत्री तक का सफर

सी. एन. अन्नादुरई 6 मार्च 1967 से 3 फरवरी 1969 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे। वे 1967 में मद्रास राज्य के अंतिम मुख्यमंत्री बने थे। दिलचस्प बात यह है कि जब 14 जनवरी 1969 को राज्य का नाम बदलकर ‘तमिलनाडु’ किया गया, तो वे इस नए नाम वाले राज्य के पहले मुख्यमंत्री कहलाए। अन्नादुरई एक प्रखर पटकथा लेखक और ओजस्वी वक्ता थे। उन्होंने द्रविड़ आंदोलन को एक नई दिशा दी और तमिलनाडु की राजनीति से कांग्रेस के दबदबे को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

एम. जी. रामचंद्रन (MGR): गरीबों के मसीहा और अपराजेय नेता

तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार एमजीआर ने 1972 में अपनी पार्टी AIADMK बनाई। उन्होंने राजनीति में वो करिश्मा कर दिखाया जो आज भी एक मिसाल है। एमजीआर लगातार तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और इतिहास रच दिया। फिल्मी पर्दे पर उनकी छवि एक रक्षक की थी, जिसे उन्होंने असल जिंदगी में गरीबों के लिए ‘मसीहा’ बनकर सच कर दिखाया। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके सामने कोई भी टिक नहीं पाया।

एम. करुणानिधि: कलम की ताकत से 5 बार संभाली कमान

एम. करुणानिधि ने 1969 से 2011 के बीच पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनका कुल कार्यकाल लगभग 19 वर्षों का रहा। करुणानिधि ने पहली बार 10 फरवरी 1969 को राज्य की बागडोर संभाली थी। अपनी बेहतरीन लेखनी और धारदार संवादों से सिनेमा में क्रांति लाने वाले करुणानिधि ने राजनीति में भी अपनी बौद्धिक क्षमता का लोहा मनवाया। वे दशकों तक तमिलनाडु की सियासत का केंद्र बने रहे।

जे. जयललिता: सिनेमा की ‘क्वीन’ से जनता की ‘अम्मा’ तक

सिनेमा जगत की ‘क्वीन’ और एमजीआर की राजनीतिक उत्तराधिकारी जयललिता को जनता ने ‘अम्मा’ का दर्जा दिया। जयललिता 1991 से 2016 के बीच रिकॉर्ड 6 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए राजनीति में नए कीर्तिमान स्थापित किए। उनकी प्रशासनिक पकड़ और लोकप्रियता ने उन्हें भारतीय राजनीति के सबसे शक्तिशाली चेहरों में से एक बना दिया।

क्या विजय बनेंगे तमिलनाडु के 5वें ‘एक्टर मुख्यमंत्री’?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या थलापति विजय इस लिस्ट में 5वां नाम बनेंगे? विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) ने इस चुनाव में DMK और AIADMK जैसे मंझे हुए गठबंधनों के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। शुरुआती रुझानों में जिस तरह से TVK के उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई है, उससे यह साफ हो गया है कि तमिलनाडु की जनता एक बार फिर किसी फिल्मी ‘जननायक’ पर भरोसा जताने के मूड में है।

थलापति विजय की TVK: 2024 से 2026 का चुनावी दंगल

विजय ने फरवरी 2024 में अपनी पार्टी के गठन का ऐलान किया था और तब से लेकर 2026 के चुनावी समर तक वे पूरी तरह सक्रिय रहे। अपनी रैलियों में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ से विजय ने यह संदेश दे दिया था कि वे सिर्फ ‘वोट कटवा’ बनने नहीं, बल्कि ‘सत्ता के दावेदार’ के रूप में मैदान में उतरे हैं। भ्रष्टाचार मुक्त शासन और जनसेवा को मुख्य एजेंडा बनाकर विजय ने अपनी राजनीतिक पारी की ठोस शुरुआत की है।

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