Ekadanta Sankashti Chaturthi Vrat 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थ आज, आखिर चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना क्यों अधूरा रहता है यह व्रत?
TV9 Bharatvarsh May 05, 2026 12:43 PM

Sankashti Chaturthi Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी वंदना से होती है. गणेश जी को समर्पित व्रतों में संकष्टी चतुर्थी का विशेष स्थान है. पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 5:24 बजे से शुरू होकर 6 मई 2026 को सुबह 7:51 बजे तक रहेगी. चूंकि व्रत का महत्व चंद्रोदय के आधार पर होता है और 5 मई को चतुर्थी तिथि चंद्रोदय के समय विद्यमान रहेगी, इसलिए यह व्रत 5 मई 2026, मंगलवार को रखा जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरे दिन निराहार रहकर की गई यह कठिन साधना तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक कि रात में चंद्रमा को अर्घ्य न दे दिया जाए? आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और आध्यात्मिक कारण के बारे में.

चंद्रमा को अर्घ्य क्यों है जरूरी?

संकष्टी चतुर्थी व्रतका सबसे अहम नियम है चंद्रमा को अर्घ्य देना. मान्यता है कि भगवान गणेश और चंद्रमा के बीच एक विशेष संबंध है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार चंद्रमा ने गणेश जी के स्वरूप का उपहास किया था, जिससे क्रोधित होकर गणेश जी ने उसे श्राप दे दिया. बाद में चंद्रमा ने क्षमा मांगी, तब गणेश जी ने श्राप को आंशिक रूप से समाप्त किया और कहा कि चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति चंद्रमा को अर्घ्य देकर उनकी पूजा करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे. इसी कारण इस व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य देना अनिवार्य माना गया है. यह प्रक्रिया भगवान गणेश और चंद्रमा दोनों की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है.

बिना अर्घ्य के व्रत अधूरा क्यों?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत दिनभर निर्जल या फलाहार रखकर किया जाता है, लेकिन इसका समापन चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही होता है. बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए व्रत खोलना अधूरा माना जाता है और इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. अर्घ्य देने का अर्थ है जल, दूध या गंगाजल से चंद्रमा का पूजन करना और उनसे सुख-शांति की कामना करना. यह एक तरह से व्रत की पूर्णता और श्रद्धा का प्रतीक है.

व्रत करने की विधि

इस दिन स्नान कर व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश की पूजा करें. दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रोदय का इंतजार करें. चंद्रमा के दर्शन होने पर उन्हें अर्घ्य दें, मंत्रों का जाप करें और फिर भगवान गणेश की आरती कर व्रत का पारण करें.

क्या मिलता है इस व्रत का फल?

मान्यता है कि एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है. विशेष रूप से यह व्रत संतान, करियर और आर्थिक समस्याओं से राहत दिलाने वाला माना जाता है.

एकदंत चतुर्थी पर अंगारकी योग का विशेष संयोग

इस बार 5 मई को मंगलवार होने के कारण यह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का विशेष संयोग बना रही है. मंगलवार को पड़ने वाली चतुर्थी बहुत ही फलदायी मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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