कुमार मगंलम बिड़ला की वोडफोन आइडिया में वापसी हो गई है. कंपनी ने अपनी 5 मई को अपनी फाइलिंग में बताया कि उन्हें नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है. उन्होंने रविंदर टक्कर को रिप्लेस किया है. कंपनी ने यह भी बताया कि टक्कर अब भी टेलीकॉम कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन के तौर पर काम करते रहेंगे. खास बात यह है कि बिड़ला की नियुक्ति उस समय हुई है जब Vodafone Idea को उसके एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया मामले में 27 प्रतिशत की बड़ी राहत मिली है.
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने 30 अप्रैल को Vodafone Idea के AGR बकाया में करीब 27% की कटौती करते हुए इसे 64,046 करोड़ रुपये कर दिया. इससे कंपनी को बड़ी राहत मिली है. साथ ही सरकार ने पेमेंट करने के लिए 5 साल की मोहलत भी दे दी है. रिपोर्ट में बताया गया कि यह फैसला तब लिया गया जब DoT ने वैधानिक बकाया का दोबारा आकलन करने के लिए एक कमेटी बनाई. इससे पहले दिसंबर में यह बकाया 87,695 करोड़ रुपये था. आज Vodafone Idea के 58 करोड़ से ज्यादा शेयरों में ट्रेडिंग हुई. AGR बकाया में कटौती की खबर के बाद कंपनी के शेयर में करीब 8% की तेजी आई और लगातार दूसरे दिन भी इसमें बढ़त बनी रही.
Vodafone Idea का AGR विवादAGR विवाद की शुरुआत 2019 में हुई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि टेलीकॉम कंपनियों को AGR के आधार पर सभी वैधानिक बकाया चुकाने होंगे, जिसमें नॉन-टेलीकॉम इनकम भी शामिल होगी. उस समय DoT ने FY2017 तक Vi का AGR बकाया 58,254 करोड़ रुपये बताया था, जबकि कंपनी के हिसाब से यह करीब 21,500 करोड़ रुपये था.
2020 में DoT और कंपनियों के आकलन में अंतर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किसी भी तरह के खुद से किए गए आकलन या दोबारा आकलन पर रोक लगा दी थी. 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई के लिए हामी भरी और सरकार को दोबारा कैलकुलेशन की इजाजत दी. Vodafone Idea में सरकार की करीब 49% हिस्सेदारी है.
क्या कंपनी के शेयरों के अच्छे दिन आएंगेजब Vodafone Idea को हाल ही में AGR में राहत मिली, तब कंपनी के शेयरों ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया था और करीब 5% तक चढ़े थे. साथ ही बड़ी ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने भी कंपनी का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 14 रुपये कर दिया. अब कुमार मंगलम बिड़ला के नए चेयरमैन बनने से निवेशकों का सेंटिमेंट और पॉजिटिव हो सकता है. 6 मई 2026 को इसका असर Vi के शेयरों पर दिख सकता है.
यह भी पढ़ें- ईरान युद्ध ने दिया भारत को भी बड़ा सबक, ऐसे कम करनी होगी कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता