भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को एक मसौदा दिशानिर्देश प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया है कि बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को लोन रिकवरी प्रक्रिया में केवल विशेष परिस्थितियों में ही अचल संपत्तियों का अधिग्रहण करने की अनुमति होगी। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में विनियमित इकाइयों से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वे अपनी नियमित कर्ज गतिविधियों के बदले गैर-वित्तीय संपत्तियों पर कब्जा करें। हालांकि, जब लोन गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) बन जाता है और कानूनी या संविदात्मक उपाय लागू हो चुके होते हैं, तब विनियमित संस्थाएं रिकवरी रणनीति के तहत गिरवी रखी गई संपत्ति का स्वामित्व ले सकती हैं।
आरबीआई ने अपने मसौदे में 'निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों पर विवेकपूर्ण मानदंड' का उल्लेख किया है। इसमें कहा गया है कि यदि इन परिसंपत्तियों का नियंत्रित और समयबद्ध निपटान किया जाए, तो वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता और विवेक बनाए रखते हुए शुद्ध वसूली को अधिकतम किया जा सकता है। मसौदे के अनुसार, केवल वे लोन इस प्रावधान के अंतर्गत आएंगे जिन्हें एनपीए घोषित किया गया हो और जिनमें अन्य सभी वसूली विकल्पों की जांच की गई हो। विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्ति (एसएनएफए) का अर्थ है वह अचल संपत्ति, जिसे किसी विनियमित संस्था ने उधारकर्ता से अपने दावे के पूर्ण या आंशिक निपटान के बदले में प्राप्त किया हो।
मसौदे के अनुसार, विनियमित संस्थाएं उधारकर्ता पर अपने दावे के पूर्ण या आंशिक निपटान के बदले में विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियां प्राप्त कर सकती हैं। इसके अलावा, ऐसे विशिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के समय पर निपटान को सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम 7 साल की अवधि का प्रस्ताव भी किया गया है। आरबीआई ने कहा कि इन मसौदा नियमों को ऐसे परिसंपत्तियों के लिए सावधानीपूर्ण नियामकीय व्यवस्था को स्पष्ट करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। इस पर 26 मई तक टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।