मां अपने बेटे के लिए 50 दुश्मन क्यों मांगती है? राजस्थान की इस कहावत में छिपा है सफलता का बड़ा सच
Hirdesh Kumar Singh May 09, 2026 02:42 PM

Motivational Quotes: राजस्थान में एक पुरानी कहावत कही जाती है 'माई ऐंडा पूत जन, दुश्मन होय पचास.' यानी ऐसा पुत्र पैदा हो जिसके पचास दुश्मन हों. पहली नजर में यह बात कठोर लग सकती है, लेकिन इसके पीछे जीवन का एक गहरा और व्यावहारिक सच छिपा है. यह कहावत दुश्मनी की नहीं, प्रभाव की बात करती है. क्योंकि इतिहास गवाह है कि जिसने भी भीड़ से अलग रास्ता चुना, जिसने लोगों की सोच बदली, जिसने नेतृत्व किया या जिसने व्यवस्था को चुनौती दी, उसके विरोधी हमेशा पैदा हुए.

आज के समय में यह कहावत इसलिए तेजी से वायरल हो रही है क्योंकि modern life में competition, visibility और public judgement पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है. Social media के दौर में अब सिर्फ आपका काम नहीं, आपकी राय, आपकी सफलता और आपकी मौजूदगी भी लोगों की प्रतिक्रिया पैदा करती है.

भीड़ हमेशा सुरक्षित लोगों को पसंद करती है

समाज अक्सर उन लोगों के साथ ज्यादा comfortable महसूस करता है जो हर जगह समझौता कर लेते हैं, हर किसी को खुश रखने की कोशिश करते हैं और कभी कोई risk नहीं लेते. ऐसे लोग किसी की सोच या सुविधा को challenge नहीं करते, इसलिए उनका विरोध भी कम होता है.

लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति तेजी से आगे बढ़ना शुरू करता है, leadership लेना शुरू करता है या अलग सोच के साथ खड़ा होता है, criticism शुरू हो जाता है. लोग सवाल उठाने लगते हैं. आपकी गलतियां ज्यादा दिखाई देने लगती हैं. कई बार वही लोग बदल जाते हैं जो कभी आपकी तारीफ किया करते थे. सफलता का सबसे painful हिस्सा मेहनत नहीं होता… लोगों का बदल जाना होता है.

Leadership के साथ विरोध क्यों बढ़ता है?

Harvard Business Review समेत कई leadership studies में यह बात सामने आई है कि high-visibility positions पर बैठे लोगों को ज्यादा criticism, emotional pressure और public scrutiny झेलनी पड़ती है. क्योंकि influence हमेशा reaction पैदा करता है.

Corporate दुनिया में भी यही दिखाई देता है. जो लोग top leadership roles तक पहुंचते हैं, उन्हें सिर्फ targets और business pressure नहीं संभालना पड़ता, बल्कि perception, jealousy और internal resistance भी झेलना पड़ता है. कई CEOs openly स्वीकार कर चुके हैं कि जैसे-जैसे influence बढ़ता है, वैसे-वैसे isolation भी बढ़ता है.

यही कारण है कि leadership comfort नहीं, psychological pressure लेकर आती है.

Social Media ने criticism को और तेज कर दिया है

आज Instagram, X और LinkedIn की दुनिया में लोग liked और accepted होना चाहते हैं. इसलिए बहुत से लोग वही बोलते हैं जो safe हो. वही दिखाते हैं जिससे controversy न हो. लेकिन इसका दूसरा असर यह हुआ है कि लोग धीरे-धीरे अपनी original identity खोने लगे हैं.

Psychologists मानते हैं कि लगातार approval पाने की चाह इंसान को average बना देती है. वह risk लेना बंद कर देता है. लेकिन इतिहास average लोगों को नहीं याद रखता. इतिहास उन्हीं लोगों को याद रखता है जिन्होंने uncomfortable questions पूछे और भीड़ से अलग खड़े होने की हिम्मत दिखाई.

दुनिया की राजनीति में भी यही सच दिखाई देता है

यह सिद्धांत सिर्फ व्यक्तियों पर नहीं, देशों पर भी लागू होता है. जब कोई देश global influence बढ़ाता है, तो उसके विरोधी भी बढ़ते हैं. अमेरिका, चीन, रूस और भारत जैसे देशों के बढ़ते प्रभाव के साथ geopolitical resistance भी बढ़ा. यही कारण है कि global leadership हमेशा pressure और opposition लेकर आती है.

Market और business world में भी यही psychology काम करती है. जो कंपनियां तेजी से grow करती हैं, वे competition, criticism और regulatory pressure का सामना भी ज्यादा करती हैं. यानी प्रभाव जितना बड़ा होगा, reaction भी उतना बड़ा होगा.

वैदिक ज्योतिष क्या कहता है?

वैदिक ज्योतिष में मजबूत सूर्य व्यक्ति को नेतृत्व, पहचान और authority देता है. मजबूत शनि उसे संघर्षों के बीच टिके रहने की क्षमता देता है, जबकि मंगल risk लेने और मुकाबला करने की शक्ति देता है. लेकिन यही ग्रह व्यक्ति के जीवन में विरोध, competition और criticism भी बढ़ाते हैं.

ज्योतिष में माना जाता है कि जिन लोगों का तेज ज्यादा होता है, वे लोगों के भीतर प्रतिक्रिया भी ज्यादा पैदा करते हैं. क्योंकि समाज अक्सर अलग दिखने वाले लोगों को पहले challenge करता है, बाद में स्वीकार करता है.

इसीलिए कई बड़े नेता, उद्योगपति, खिलाड़ी और public figures अपने जीवन में popularity के साथ-साथ intense opposition भी झेलते हैं.

असली सवाल दुश्मनों का नहीं, प्रभाव का है

इस कहावत का अर्थ यह नहीं कि जीवन में दुश्मन बनाना जरूरी है. बल्कि इसका संकेत यह है कि अगर आप जीवन में कुछ बड़ा, अलग और प्रभावशाली करने की कोशिश करेंगे, तो विरोध स्वाभाविक रूप से आएगा.

अगर हर कोई हमेशा आपसे खुश है…
अगर किसी ने कभी आपके विचारों का विरोध नहीं किया…
अगर आपकी सफलता से किसी को फर्क नहीं पड़ा…

तो संभव है कि आपने अब तक ऐसा कुछ किया ही नहीं जिससे दुनिया असहज महसूस करे.

सबसे बड़ा सच

भीड़ हमेशा सुरक्षित लोगों को पसंद करती है, क्योंकि वे व्यवस्था को disturb नहीं करते. लेकिन इतिहास अक्सर उन्हीं लोगों का लिखा जाता है जिन्होंने विरोध, आलोचना और pressure के बावजूद अपना रास्ता नहीं छोड़ा.

शायद इसलिए राजस्थान की यह सदियों पुरानी कहावत आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है जितनी पहले थी. क्योंकि समय बदलता है, technology बदलती है, platforms बदलते हैं… लेकिन एक चीज नहीं बदलती, जो सबसे ज्यादा प्रभाव पैदा करता है, उसी का सबसे ज्यादा विरोध भी होता है.

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