Shani Dev Ki Puja Ke Niyam:हिंदू धर्म शास्त्रों और ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है. शनि देव को कर्म फल दाता कहा जाता है. शनिवार का दिन शनि देव की पूजा को समर्पित किया गया है. इस दिन पूरे विधि-विधान से शनि देव की पूजा और साथ ही व्रत किया जाता है. साढ़ेसाती और ढैय्या से परेशान जातकों के लिए शनिवार के दिन शनि की पूजा और व्रत वरदान साबित होता है.
इस दिन शनि की पूजा और व्रत करने से साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है. साथ ही शनि की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है. हालांकि, शनि देव की पूजा में कुछ नियमों का पालन करने के लिए कहा जाता है. शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग न करना इन्हीं नियमों में शामिल है. शनि की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है, लेकिन आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों है?
शनि देव की पूजा में तांबा क्यों नहीं किया जाता वर्जित?अन्य देवी-दवताओं की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग बहुत शुभ और सर्वश्रेष्ठ कहा गया है, लेकिन शनि देव की पूजा के समय भूलकर भी तांबे के बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि शनि देव की पूजा में अगर तांबे के बर्तनों का उपयोग किया जाता है, तो शनि देव क्रोधित हो जाते हैं. इसके पीछे का कारण सूर्य देव को बताया जाता है.
दरअसल, तांबा सूर्य देव से संबंधित धातु मानी जाती है. जब भी पंडित या ज्योतिषाचार्य सूर्य देव को अर्घ्य देने या सूर्य की पूजा करने की सलाह देते हैं, तो तांबे के लोटे का उपायोग करने की सलाह देते हैं. सूर्य देव और शनि देव में पिता और पुत्र का संबंध भले ही हो, लेकिन धर्म शास्त्रों में दोनों में शत्रुता का भाव बताया गया है. ऐसे में शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग वर्जित किया गया है.
शनि देव की पूजा में लोहे का करें उपयोगजब भी शनि देव की पूजा करें लोहे के बर्तनों को उपयोग करें. लोहे का संबंध शनि देव से माना जाता है. शनि देव की पूजा के समय लोहे और सरसों के तेल को उपयोग किया जाता है. इससे शनिदेव बहुत प्रसन्न होते हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.