Mothers Day: मां के जिस गुस्से से खौफ खाते थे वॉरेन बफे, उसी ने उन्हें बना दिया दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक!
TV9 Bharatvarsh May 10, 2026 11:42 AM

Mothers Day: शेयर बाजार (Stock Market) की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसने वॉरेन बफे (Warren Buffett) का नाम न सुना हो. दुनिया के सबसे बड़े निवेशक, अरबों डॉलर की नेटवर्थ और बेहद सादगी भरी जिंदगी. यही उनकी असली पहचान है. लेकिन आज मदर्स डे के मौके पर, हम उनके इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो की नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी के उस पन्ने की बात करेंगे जिसने उन्हें ‘वॉरेन बफे’ बनाया. यह कहानी सिर्फ पैसों की नहीं है, बल्कि उनके और उनकी मां लीला स्टाल बफे (Leila Stahl Buffett) के बीच के उस मुश्किल रिश्ते की है, जिसने एक सहमे हुए बच्चे को दुनिया का सबसे अनुशासित इन्वेस्टर बना दिया.

मां से खौफ खाते थे बफे

जाने-माने लेखक एलिस श्रोएडर ने बफे की मशहूर बायोग्राफी ‘द स्नोबॉल’ (The Snowball) में उनके बचपन का बड़ा ही हैरान करने वाला जिक्र किया है. वॉरेन बफे का बचपन किसी आम अमीर बच्चे जैसा बिल्कुल नहीं था. उनकी मां लीला का स्वभाव बेहद सख्त था. घर में इतना कड़ा अनुशासन था कि अक्सर छोटी-छोटी बातों पर भी तनाव का माहौल बन जाता था. खुद बफे याद करते हैं कि कई बार जब उनकी मां का मूड खराब होता, तो पूरे घर में सन्नाटा पसर जाता था.

एक वाकया अक्सर उनके करीबी बताते हैं. एक बार डिनर टेबल पर किसी बात को लेकर मां नाराज हो गईं. माहौल इतना भारी हो गया कि बच्चे चुपचाप सिर झुकाकर बैठ गए और नन्हे वॉरेन डर के मारे अपने कमरे में जाकर दुबक गए. उस वक्त उस छोटे से बच्चे को शायद ही समझ आता होगा कि उसकी मां का यह कड़ा रवैया असल में उसके भविष्य की कौन सी नींव रख रहा है.

फिजूलखर्ची पर पाबंदी ने सिखाई ‘मनी मैनेजमेंट’

वॉरेन बफे ने ‘मनी मैनेजमेंट’ (Money Management) और ‘कॉस्ट कटिंग’ की पहली क्लास हॉर्वर्ड या कोलंबिया यूनिवर्सिटी में नहीं, बल्कि अपने ही घर में ली थी. उनकी मां को फिजूलखर्ची से सख्त नफरत थी. घर में हर एक पैसे का हिसाब रखा जाता था और चीजों को बहुत संभालकर इस्तेमाल किया जाता था.

यही वो वक्त था जब वॉरेन का दिमाग ‘कंपाउंडिंग’ और पैसे से पैसा बनाने की दिशा में दौड़ने लगा. जिस उम्र में बाकी बच्चे महंगे खिलौनों की जिद करते थे, तब वॉरेन यह सोचते थे कि अपनी पॉकेट मनी को कैसे बढ़ाया जाए. उन्होंने घर-घर जाकर च्युइंग गम बेचे, कोका-कोला की बोतलें सप्लाई कीं और अखबार बांटकर पैसे कमाए. सबसे बड़ी बात—उन्होंने इन पैसों को यूं ही खर्च करने के बजाय बचाना और निवेश करना शुरू किया.

अनुशासन बना बाजार में सबसे बड़ा हथियार

अगर आप वॉरेन बफे की इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी को करीब से एनालाइज करें, तो उसमें आपको एक चीज सबसे कॉमन मिलेगी, धैर्य और अनुशासन. बफे ने बाद में खुद इस बात को स्वीकार किया कि उनका बचपन इमोशनल लेवल पर काफी चुनौतीपूर्ण था. लेकिन इसी माहौल ने उन्हें अंदर से मजबूत (Emotionally strong) बना दिया. उन्होंने कम उम्र में ही यह समझ लिया था कि जिंदगी में असली ‘सिक्योरिटी’ (Financial Security) सिर्फ बैंक में पैसा होने से नहीं आती, बल्कि सही समय पर सही फैसले लेने और कड़े अनुशासन में रहने से आती है. आज शेयर बाजार चाहे कितना भी क्रैश क्यों न हो जाए, बफे कभी पैनिक नहीं करते. उनका यह ठहराव उन्हें उसी मुश्किल बचपन से मिला है.

सादगी जो आज भी कायम है

यही वजह है कि आज दुनिया के टॉप अरबपतियों की लिस्ट में शामिल होने के बावजूद, वॉरेन बफे किसी फाइव स्टार विला में नहीं, बल्कि ओमाहा के उसी पुराने घर में रहते हैं जिसे उन्होंने दशकों पहले खरीदा था. उनके नजरिए में पैसा कोई रुतबा दिखाने की चीज नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. मदर्स डे 2026 पर वॉरेन बफे की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में कोई भी रिश्ता पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता. कई बार जिन रिश्तों में सबसे ज्यादा संघर्ष और सख्ती होती है, वही हमें जीवन का सबसे बड़ा फलसफा सिखा जाते हैं. बचपन में जिस मां के गुस्से से वॉरेन बफे कांपते थे, असल में उसी सख्ती ने तराश कर उन्हें दुनिया का सबसे कामयाब और अनुशासित निवेशक बना दिया.

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