Solar and lunar Eclipse 2026 Dates: साल 2026 खगोलीय दृष्टि से बेहद हलचल भरा रहने वाला है. इस साल कुल चार ग्रहणों का योग है, सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण. जहां 17 फरवरी और 3 मार्च के ग्रहण बीत चुके हैं, वहीं अब सबकी नजरें 12 अगस्त को लगने वाले सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को होने वाले आंशिक चंद्र ग्रहण पर टिकी हैं. रत में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक और सूतक के नियमों से जुड़ा अवसर माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ग्रहण लगते ही मंदिरों के कपाट क्यों बंद हो जाते हैं? खाने की चीजों में तुलसी क्यों डाली जाती है? आइए, इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक पहलुओं को आसान भाषा में समझते हैं.
ग्रहण लगते ही क्यों बदल जाते हैं नियम?धार्मिक मान्यताओं के अनुसारग्रहण का समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा के बढ़ने का काल माना जाता है. पुराणों में राहु और केतु को ग्रहण का कारण बताया गया है. मान्यता है कि जब राहु सूर्य या चंद्रमा को ग्रसता है, तब प्रकृति और मानव जीवन पर उसका सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है. इसी कारण इस दौरान सामान्य कामों में सावधानी बरतने की परंपरा बनी. ज्योतिष में ग्रहण को संवेदनशील समय माना गया है. कहा जाता है कि इस दौरान मानसिक स्थिति, स्वास्थ्य और वातावरण पर असर पड़ सकता है. इसलिए धार्मिक गतिविधियों, भोजन और दिनचर्या में विशेष नियम अपनाए जाते हैं.
ग्रहण में मंदिरों के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं?ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद करने की परंपरा सदियों पुरानी है. धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण की शुद्धता प्रभावित होती है, इसलिए भगवान की मूर्तियों को भी इस प्रभाव से बचाने के लिए मंदिर बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना और भोग नहीं लगाया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की विशेष शुद्धि की जाती है. गंगाजल छिड़का जाता है और फिर पूजा-पाठ शुरू होता है. कई बड़े मंदिरों में ग्रहण समाप्ति के बाद विशेष आरती और मंत्रोच्चार भी किए जाते हैं.

ग्रहण के दौरान भोजन न बनाने और न खाने की परंपरा के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण बताए जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में सूक्ष्म नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं, जिससे भोजन दूषित हो सकता है. वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पुराने समय में ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें कम हो जाती थीं, जिससे बैक्टीरिया तेजी से पनपने की आशंका मानी जाती थी. इसलिए भोजन को सुरक्षित रखने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा शुरू हुई. आज भी कई घरों में ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी डाल दी जाती है.
सूतक काल क्या होता है?ग्रहण से पहले लगने वाले समय को सूतक काल कहा जाता है. सूर्य ग्रहण में सूतक लगभग 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण में करीब 9 घंटे पहले शुरू माना जाता है. सूतक लगते ही शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं. पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, विवाह, गृह प्रवेश और मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इन नियमों में कुछ छूट दी जाती है.
गर्भवती महिलाओं को क्यों दी जाती है सावधानी बरतने की सलाह?ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि ग्रहण का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है. इसलिए उन्हें घर के अंदर रहने, नुकीली चीजों का प्रयोग न करने और अधिक तनाव से बचने को कहा जाता है. हालांकि विज्ञान में इन मान्यताओं के बारे में कुछ नहीं बताया गया है,लेकिन भारतीय परंपरा में एहतियात के तौर पर इन नियमों का पालन आज भी किया जाता है.
ग्रहण के दौरान क्या करना शुभ माना जाता है?धार्मिक ग्रंथों में ग्रहण काल को साधना और मंत्र जाप के लिए बेहद प्रभावशाली समय बताया गया है. इस दौरान भगवान के नाम का स्मरण, मंत्र जाप, ध्यान और दान करना शुभ माना जाता है. कई लोग ग्रहण के पूरा होने के बाद स्नान करते हैं और गरीबों को दान देते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से ग्रहण के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
सूतक के नियमशास्त्रों के अनुसार, जिस ग्रहण का दृश्य प्रभाव किसी स्थान पर नहीं पड़ता, वहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाता. यही कारण है कि 12 अगस्त 2026 के सूर्य ग्रहण का सूतक भारत में प्रभावी नहीं होगा, क्योंकि यह यहां दिखाई नहीं देगा. लेकिन 28 अगस्त 2026 के आंशिक चंद्र ग्रहण के भारत में दिखाई देने वाले क्षेत्रों में सूतक नियमों का पालन किया जाएगा.
आस्था और विज्ञान का अनोखा संगमग्रहण को लेकर लोगों की आस्था और परंपराएं हजारों सालों से चली आ रही हैं. जहां विज्ञान इसे सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति से जोड़ता है, वहीं धर्म इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन पर पड़ने वाले कुछ प्रभावों से जोड़कर देखता है. यही वजह है कि ग्रहण लगते ही लोगों की दिनचर्या, खान-पान और पूजा-पाठ के नियम अचानक बदल जाते हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.