इजराइल ने इस देश के रेगिस्तान में बना रखा था सीक्रेट बेस, ईरान युद्ध के समय एयरफोर्स को पहुंचाई मदद
TV9 Bharatvarsh May 10, 2026 03:43 PM

ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान इजराइल ने चुपचाप इराक के रेगिस्तान में एक सीक्रेट मिलिट्री बेस बना लिया था. इस बेस का इस्तेमाल ईरान पर हवाई हमलों में मदद के लिए किया गया. अमेरिकी अधिकारियों समेत कई सूत्रों ने बताया कि इजराइल ने यह बेस युद्ध शुरू होने से ठीक पहले बनाया था और अमेरिका को इसकी जानकारी थी. वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.

इस सीक्रेट बेस पर इजराइल की स्पेशल फोर्स और एयरफोर्स से जुड़े जवान मौजूद थे. यह जगह इजराइली एयरफोर्स के लिए सपोर्ट सेंटर की तरह काम कर रही थी. यहां सर्च एंड रेस्क्यू टीमें भी तैनात थीं, ताकि अगर ईरान में हमला करते समय कोई इजराइली विमान गिर जाए तो पायलटों को तुरंत बचाया जा सके.

इजराइल ने US को मदद की पेशकश की थी

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के इस्फहान इलाके के पास एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान गिर गया था. उस समय इजराइल ने बचाव अभियान में मदद की पेशकश की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने खुद अपने दोनों एयरमैन को सुरक्षित निकाल लिया. हालांकि उस दौरान ऑपरेशन को सुरक्षित रखने के लिए इजराइल ने हवाई हमले किए थे.

मार्च की शुरुआत में यह सीक्रेट बेस लगभग पकड़ा गया था. इराकी मीडिया के मुताबिक, एक स्थानीय चरवाहे ने इलाके में हेलिकॉप्टरों की आवाजाही और संदिग्ध सैन्य गतिविधियां देखीं. उसने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी. इसके बाद इराकी सेना जांच के लिए वहां पहुंची.

सूत्रों के मुताबिक, इजराइल ने अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए इराकी सैनिकों पर एयरस्ट्राइक कर दी. इस हमले में एक इराकी सैनिक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. इराक के जॉइंट ऑपरेशंस कमांड के डिप्टी कमांडर कैस अल-मुहम्मदावी ने इस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि यह हमला बिना इराक की मंजूरी और बिना किसी कोऑर्डिनेशन के किया गया. बाद में इराक की काउंटर टेररिज्म सर्विस ने 2 और टीम भेजी, जिन्होंने इलाके में सैन्य मौजूदगी की पुष्टि की. हालांकि इराकी सरकार के प्रवक्ता ने इस घटना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और यह भी बताने से मना कर दिया कि क्या उन्हें इजराइली बेस की जानकारी थी.

इराक ने UN में शिकायत दर्ज कराई

बाद में इराक ने इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र में शिकायत भी दर्ज कराई. शुरुआत में इराक को शक था कि हमले में अमेरिका शामिल था, लेकिन बाद में सूत्रों ने कहा कि अमेरिका इस कार्रवाई का हिस्सा नहीं था. अमेरिका भी अपने ठिकानों और अन्य एसेट्स की रक्षा के लिए इराक में कई हमले कर चुका है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि इराक का पश्चिमी रेगिस्तानी इलाका बहुत बड़ा और कम आबादी वाला है. इसी वजह से यह गुप्त सैन्य ठिकाने बनाने के लिए सही जगह माना जाता है. पहले भी अमेरिका ने 1991 और 2003 में सद्दाम हुसैन के खिलाफ सैन्य अभियानों में इस इलाके का इस्तेमाल किया था. युद्ध के दौरान इजराइल ने ईरान में हजारों हवाई हमले किए. मार्च में इजराइली एयरफोर्स प्रमुख टॉमर बार ने भी कहा था कि एयरफोर्स की स्पेशल यूनिट्स ऐसे सीक्रेट मिशनों पर काम कर रही हैं, जिनके बारे में लोग सोच भी नहीं सकते.

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