Mother Day 2026: हर मां को करनी चाहिए फाइनेंशियल प्लानिंग, एक्सपर्ट्स ने बताए निवेश के स्मार्ट तरीके
TV9 Bharatvarsh May 10, 2026 04:42 PM

मदर्स डे पर जहां मांओं की मेहनत, ताकत और समर्पण का जश्न मनाया जाता है, वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि उनकी आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. चाहे कोई मां अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए प्लानिंग कर रही हो या रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम चाहती हो, सही फाइनेंशियल प्लानिंग और समझदारी से निवेश लंबी अवधि में बड़ा सहारा बन सकता है. मदर्स डे 2026 के मौके पर दो एक्सपर्ट्स से बात की और जाना कि मांओं के लिए सही पोर्टफोलियो और फाइनेंशियल सिक्योरिटी कैसे बनाई जा सकती है.

मांओं के लिए कौन-से MF बेहतर?

LXME की फाउंडर प्रीति राठी गुप्ता ने कहा कि सबसे जरूरी बात है निवेश की शुरुआत करना, चाहे रकम छोटी ही क्यों न हो. उनके मुताबिक, जो महिलाएं पहली बार निवेश कर रही हैं, उनके लिए फ्लेक्सीकैप और लार्जकैप फंड अच्छे विकल्प हो सकते हैं. इनमें जोखिम थोड़ा कम रहता है और लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है.

बच्चों की पढ़ाई जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए उन्होंने 10 से 15 साल के नजरिए से इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह दी. उन्होंने कहा, अगर कोई मां जल्दी शुरुआत करके हर महीने 2,000 से 5,000 रुपये की SIP भी शुरू करती है, तो समय के साथ बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छा फंड तैयार हो सकता है.

रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर उन्होंने इक्विटी से धीरे-धीरे डेट और हाइब्रिड फंड की तरफ शिफ्ट होने की सलाह दी, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो.

भवा सर्विसेज LLP के सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पल्लव अग्रवाल ने कहा कि पहली बार निवेश करने वालों के लिए एग्रेसिव हाइब्रिड फंड अच्छा विकल्प हो सकता है. इनमें शुद्ध इक्विटी फंड की तुलना में उतार-चढ़ाव कम होता है, लेकिन लंबे समय में रिटर्न अच्छा मिल सकता है. उन्होंने मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड का भी सुझाव दिया, जो इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसी अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करते हैं.

वर्किंग मदर्स और होममेकर्स के लिए अलग रणनीति

एक्सपर्ट्स का मानना है कि नौकरी करने वाली महिलाओं और गृहिणियों की फाइनेंशियल जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए निवेश का तरीका भी अलग होना चाहिए. प्रीति राठी गुप्ता के अनुसार, नियमित आय वाली वर्किंग मदर्स अपने पोर्टफोलियो में 60-70% हिस्सा इक्विटी में रख सकती हैं. बाकी 20-25% डेट और 5-10% गोल्ड में निवेश किया जा सकता है.

वहीं, गृहिणियों के लिए थोड़ा सुरक्षित पोर्टफोलियो बेहतर माना गया है. उनके लिए 50-60% इक्विटी और ज्यादा हिस्सा डेट इंस्ट्रूमेंट्स में रखने की सलाह दी गई है. पल्लव अग्रवाल ने भी लगभग यही राय दी. उनके मुताबिक, वर्किंग मदर्स 65% इक्विटी, 20% डेट और 15% प्रेशियस मेटल्स में निवेश कर सकती हैं. जबकि होममेकर्स 50% इक्विटी, 30% डेट और 20% गोल्ड जैसे एसेट्स में निवेश कर सकती हैं.

घर के खर्च और निवेश में कैसे बनाएं बैलेंस?

एक्सपर्ट्स ने कहा कि चाहे महिला नौकरी करती हो या नहीं, उसे अपने नाम से निवेश जरूर करना चाहिए और परिवार के आर्थिक फैसलों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. प्रीति राठी गुप्ता ने पे योरसेल्फ फर्स्ट फॉर्मूला अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा, EMI, स्कूल फीस या घर के खर्च से पहले हर महीने SIP में पैसा डालना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.

उन्होंने अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग SIP और निवेश खाते बनाने की सलाह दी, जैसे इमरजेंसी फंड, शॉर्ट टर्म जरूरतें और लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन. पल्लव अग्रवाल ने सुझाव दिया कि आय का लगभग 50% जरूरी खर्चों, 20% लाइफस्टाइल और 30% बचत व निवेश में जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, हर फाइनेंशियल गोल के लिए अलग SIP होना जरूरी है. इससे निवेश में अनुशासन बना रहता है और जो बचेगा वो निवेश करेंगे वाली गलती नहीं होती.

इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस क्यों जरूरी?

दोनों एक्सपर्ट्स ने कहा कि म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस होना बेहद जरूरी है. प्रीति राठी गुप्ता ने कहा, म्यूचुअल फंड दौलत बनाने का जरिया है, लेकिन इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस सुरक्षा कवच का काम करते हैं. उन्होंने सलाह दी कि कम से कम 6 महीने के घर खर्च जितनी रकम लिक्विड फंड या हाई इंटरेस्ट सेविंग अकाउंट में रखनी चाहिए.

पल्लव अग्रवाल के मुताबिक, 6 से 12 महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड होना चाहिए. साथ ही पूरे परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और कमाने वाले सदस्यों के लिए टर्म इंश्योरेंस जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि कार, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महंगे सामान का भी इंश्योरेंस होना चाहिए. साथ ही घर और उसमें रखे सामान को आग, चोरी या भूकंप जैसी घटनाओं से सुरक्षित रखने के लिए होम इंश्योरेंस लेना चाहिए.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सफल निवेश का सबसे बड़ा मंत्र है. जल्दी शुरुआत करना, नियमित निवेश करना और बाजार के छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से घबराकर बार-बार पोर्टफोलियो न बदलना. सही बैलेंस और अनुशासन के साथ मांएं अपने और अपने परिवार के लिए मजबूत आर्थिक सुरक्षा तैयार कर सकती हैं.

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