भारत के पड़ोसी देश में मिला खजाना, बंद कुएं से निकला तेल, गैस का भी पता चला
प्रतीक्षा राणावत June 06, 2026 09:12 AM

Crude Oil News: ईरान और यूएस के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हॉर्मुज ब्लॉक है, जिसके कारण क्रूड ऑइल की कीमतें वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है. इसका असर हर एक देश में पड़ रहा है. ना केवल भारत बल्कि इसके पड़ोसी देशों में भी क्रूड ऑइल का आयात ना होने के कारण गैस और तेल की किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है. इसी बीच अब भारत के एक पड़ोसी मुल्क में तेल और गैस का खजाना मिला है.

किस देश मे मिला तेल का खजाना?
ये देश कोई और नहीं बल्कि भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान है. पाकिस्तान की सरकारी तेल और गैस कंपनी OGDCL (ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड) को सिंध प्रांत के संघार जिले में स्थित बॉबी डीप-1 (Bobi Deep-1) कुएं से तेल और गैस बड़ी संख्या में मिला है. कंपनी इस ऊर्जा को देश के उत्थान के लिए इस्तेमाल करने वाली है.

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क्या कहा कंपनी ने?
OGDCL के अनुसार बॉबी डीप-1 कुएं में लोअर गोरू फॉर्मेशन की एक परत से हर रोज 2 हजार बैरल तेल और 11 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट गैस का उत्पादन हो सकता है. रिसर्च के दौरान इस बात की पुष्टि हो गई है कि इस क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) का अच्छा भंडार मौजूद है. कंपनी ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है, क्योंकि बॉबी और धमराकी माइनिंग लीज क्षेत्र में इस तरह की ये पहली खोज है.

चुनौतियों का करना पड़ा सामना
इस परियोजना के दौरान कंपनी को कई तकनीकी और जमीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण पहले ड्रिलिंग का काम रोकना पड़ा था. हालांकि परियोजना को बंद करने की जगह OGDCL ने लोकल लोगों और वैज्ञानिकों की मदद ली. कंपनी के इंजीनियरों और भूवैज्ञानिकों ने जमशोरो स्थित सिंध विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर प्योर एंड एप्लाइड जियोलॉजी के साथ मिलकर डीटेल में स्टडी की.

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आधुनिक सर्वेक्षण, भूगर्भीय विश्लेषण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद एक नया मॉडल तैयार किया गया, जिससे जोखिम कम हुआ और ड्रिलिंग का काम दोबारा शुरू किया जा सका. आखिरकार लक्ष्य तक पहुंचने के बाद ये खोज हुई. OGDCL का मानना है कि इस खोज से पाकिस्तान के घरेलू तेल और गैस उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी. इससे भविष्य में नए भंडार जोड़ने और ऊर्जा क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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