महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे से गांव से निकली चार बहनों ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे समाज के लिए मिसाल बन गया है. चारों बहनों की चर्चा जिले भर में हो रही है. गन्ने के खेतों में मजदूरी कर परिवार चलाने वाले दंपति की चारों बेटियों को मुंबई पुलिस में नौकरी मिल गई है और सभी वर्दी का सपना साकार कर चुकी हैं. ऐसे में आइए जानते हैं उनके बारे में.
बीड जिले के जिवाचीवाडी गांव निवासी हनुमंत चौरे और उनकी पत्नी दैवशाला चौरे पिछले 25 वर्षों से गन्ना कटाई का काम कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई और उनके सपनों को कभी नहीं छोड़ा. दंपति ने बेटियों को पढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.
चारों बेटियां का पुलिस में हुआ चयनचौरे दंपति की बेटियां उषा, अर्चना, गीतांजली और शीतल ने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. संघर्षों के बीच पढ़ाई जारी रखी और पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटी रहीं. उनकी मेहनत रंग लाई. पहले दो बेटियों का चयन मुंबई पुलिस में हुआ. इसके बाद हाल ही में हुई भर्ती प्रक्रिया में दो अन्य बहनों ने भी सफलता हासिल कर मिशाल पेश कर दी. पहले 2 बहने साल 2019 में मुंबई पुलिस में भर्ती हुई थीं. वहीं दो अन्य बहनों का चयन इस साल मुंबई पुलिस भर्ती में हुआ.
गांव में खुशी की लहरचारों बहनों के मुंबई पुलिस में चयनित होने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है. परिवार की इस उपलब्धि को लोग बेटियों की मेहनत और माता-पिता के संघर्ष का परिणाम बता रहे हैं. जिन हाथों ने वर्षों तक खेतों में पसीना बहाकर परिवार को संभाला, उन्हीं हाथों की परवरिश ने चार बेटियों को पुलिस की वर्दी तक पहुंचा दिया.
दंपति का कहना है कि उन्होंने हमेशा बेटियों को आगे बढ़ने और सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया. आज उनकी सफलता देखकर वर्षों की मेहनत सफल होती नजर आ रही है.
जिवाचीवाडी की चार बहनों की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की सफलता नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है जो अभावों के बीच भी अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखते हैं. इन चार बहनों की सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती.
ये भी पढ़ें – बीड़ी का बंडल, 150 रुपये चोरी का शक… दोस्त ने मजदूर को मार डाला