करीब एक दशक तक भारत की ऑटो कंपनियों का पूरा फोकस SUV (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) सेगमेंट पर रहा. ज्यादा मुनाफा, ग्राहकों की बढ़ती पसंद और बड़ी गाड़ियों की मांग ने कंपनियों को SUV और कॉम्पैक्ट SUV पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया. इस दौरान हैचबैक कारें, जो कभी भारतीय कार बाजार की रीढ़ मानी जाती थीं, धीरे-धीरे पीछे छूट गईं.
यह रणनीति सफल भी रही. आज भारत में बिकने वाली कुल पैसेंजर गाड़ियों में आधे से ज्यादा हिस्सा SUV का है. लेकिन अब बढ़ती महंगाई, कारों की ऊंची कीमतें और पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की घटती संख्या ने कंपनियों को फिर से छोटे कार बाजार की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है.
छोटी कारों पर फिर बढ़ा भरोसामारुति सुजुकी के चेयरमैन R. C. Bhargava ने हाल ही में कहा कि कंपनी छोटे कार सेगमेंट और SUV दोनों पर काम कर रही है. उनके मुताबिक भारत जैसे देश में छोटी कारों का भविष्य लंबे समय तक मजबूत रहेगा क्योंकि बड़ी आबादी को सस्ती और आसान व्यक्तिगत परिवहन की जरूरत है.
मारुति की पहचान लंबे समय से Maruti Suzuki Alto, Maruti Suzuki WagonR और Maruti Suzuki Swift जैसी कारों से रही है. ऐसे में कंपनी का दोबारा इस सेगमेंट पर जोर देना बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.
टाटा बना रही है हैचबैक को फिर से आकर्षकदूसरी ओर Tata Motors हैचबैक कारों को फिर से ग्राहकों की पसंद बनाने की कोशिश कर रही है. कंपनी ने नई पीढ़ी की Tata Tiago और Tata Tiago.ev लॉन्च की हैं, जिनमें कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं जो पहले महंगी कारों में ही मिलते थे.
नई टियागो में 10.25 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, वायरलेस चार्जिंग, ड्यूल-स्क्रीन डैशबोर्ड और 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स शामिल हैं.
महंगाई ने बढ़ाई छोटे कारों की अहमियतपिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा मानकों, नई तकनीक और बढ़ती लागत के कारण कारों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है. इसका सबसे ज्यादा असर पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि हैचबैक कारें आज भी उन लोगों की पहली पसंद हैं जो अपनी पहली कार खरीदना चाहते हैं या परिवार के लिए दूसरी कार लेना चाहते हैं. खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इनकी मांग मजबूत बनी हुई है.
इलेक्ट्रिक हैचबैक भी बन सकती हैं गेमचेंजरविशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा और ईवी फाइनेंसिंग आसान होगी, सस्ती इलेक्ट्रिक हैचबैक कारों की मांग तेजी से बढ़ सकती है.
बाजार का नया समीकरणSUV का दबदबा अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन ऑटो कंपनियां अब समझ रही हैं कि केवल महंगी गाड़ियों के भरोसे बिक्री बढ़ाना मुश्किल होगा. नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए सस्ती और फीचर-लोडेड हैचबैक कारें फिर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. यही वजह है कि मारुति और टाटा जैसी कंपनियां अब छोटे कार सेगमेंट को एक बार फिर अपने विकास का बड़ा आधार मान रही हैं.