राजस्थान के बारां जिले से पान मसाला विज्ञापनों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है. दाने-दाने में केसर का दम जैसे दावे वाले विज्ञापन को लेकर दायर शिकायत पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ और विमल पान मसाला कंपनी के मालिक विमल अग्रवाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.
इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर पान मसाला और गुटखा उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर बहस तेज हो गई है. खासकर उन विज्ञापनों पर सवाल उठ रहे हैं जिनमें बड़े फिल्मी सितारे प्रचार करते नजर आते हैं.
क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता का आरोप है कि विमल पान मसाला के विज्ञापन में दाने-दाने में केसर का दम होने का दावा किया जाता है, जो आम लोगों को भ्रमित करता है. उनका कहना है कि कुछ रुपये में बिकने वाले पान मसाला पाउच में दुनिया के सबसे महंगे मसालों में शामिल केसर होने का दावा करना उपभोक्ताओं को गुमराह करने जैसा है.
शिकायत में कहा गया है कि लोग अपने पसंदीदा सितारों पर भरोसा करके ऐसे उत्पाद खरीदते और इस्तेमाल करते हैं. इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है.
9 जुलाई को पेश होना होगामामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. अदालत ने शाहरुख खान, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ और कंपनी के मालिक विमल अग्रवाल को 9 जुलाई को पेश होने के निर्देश दिए हैं.
कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी पक्ष व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं. सुनवाई के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों पर उनका जवाब लिया जाएगा.
पहले भी विवादों में रहे हैं ऐसे विज्ञापनयह पहली बार नहीं है जब पान मसाला या सरोगेट विज्ञापनों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो. इससे पहले भी कई बार उपभोक्ता संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ऐसे विज्ञापनों पर सवाल उठाए हैं.
देश के अलग-अलग हिस्सों में अदालतों और उपभोक्ता मंचों पर इन विज्ञापनों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं. कुछ मामलों में जन विरोध बढ़ने पर कई सितारों को आलोचना का सामना करना पड़ा और कुछ ने ऐसे विज्ञापनों से दूरी भी बना ली थी.
सुनवाई पर टिकी निगाहेंअब सभी की नजर 9 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है. यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड के ये बड़े सितारे और कंपनी की ओर से कोर्ट में क्या जवाब दिया जाता है. साथ ही यह मामला भ्रामक विज्ञापनों और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर भविष्य में भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है.