Parama Ekadashi Vrat Katha: आज ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है. ऐसे में आज भक्त भगवान विष्णु को समर्पित परमा एकादशी का व्रत रखे हुए हैं. ये एकादशी अधिकमास या कहें पुरुषोत्तम मास में तीन साल में एक बार आती है. परमा एकादशी के दिन विधि पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु का पूजन करने से सारे पापों का नाश हो जाता है.
साथ ही भगवान की कृपा प्राप्त होती है. विष्णु जी की कृपा से पूरा जीवन खुशहाली में बीतता है. यही नहीं इस व्रत के प्रभाव और भगवान के आशीर्वाद से मृत्यु के बाद आत्मा जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर वैकुंठ धाम में स्थान पाती है. परमा एकादशी के दिन पूजा के समय व्रत कथा का पाठ भी किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन बिना व्रत कथा पढ़े पूजा और व्रत का पूरा फल नहीं मिलता. वहीं व्रत कथा पढ़ने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं, तो आइए पढ़ते हैं परमा एकादशी की व्रत कथा.
परमा एकादशी की कथा (Parama Ekadashi Ki Katha)पौरणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में काम्पिल्य नगर में एक सुमेधा नाम का ब्राह्मण रहा करता था. वो अपनी पत्नी के साथ धर्म के कार्य किया करता था. सुमेधा की पत्नी नियम से व्रत, पूजा-पाठ करती थी. घर पर आए सभी अतिथियों का आदर-सत्कार करती थी. वो स्वयं भले भूखी रहती, लेकिन अतिथियों को बिना भोजन किए वापस नहीं जाने देती थी. इतने धर्म कर्म के बाद भी सुमेधा और उसकी पत्नी गरीबी में जीवन बिता रहे थे.
एक दिन सुमेधा ने अपनी पत्नी से परदेस जाकर धन कमाने की बात कही. इस पर ब्राह्मण की पत्नी ने कहा कि व्यक्ति अपने भाग्य और पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त करता है. अगर भगवान ने हमको गरीबी और दरिद्रता भरा जीवन दिया है, तो भी हम यहीं अपने कर्म करें, क्योंकि जो ईश्वर चाहेगा वही होगा. पत्नी की इन बातों को सुनकर सुमेधा परदेस नहीं गया. वहीं पर रहकर काम करने लगा. एक दिन उसके घर पर कौण्डिन्य ऋषि आए.
तब सुमेधा और उसकी पत्नी ने उनकी सेवा की. पति-पत्नी की सेवा से कौण्डिन्य ऋषि बहुत प्रसन्न हुए. फिर पति-पत्नी ने कौण्डिन्य ऋषि से अपनी गरीबी दूर करने के लिए उपाय जानना चाहा. तब कौण्डिन्य ऋषि ने उन दोनों को अधिकमास की परमा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. उन्होंने परमा एकादशी व्रत और पूजा की विधि बताई. इसके बाद अधिकमास की परमा एकादशी आई तो उन दोनों ने कौण्डिन्य ऋषि के बताए अनुसार व्रत रखा और श्रीहरि विष्णु की पूजा की.
इसके बाद ब्राह्मणों को खाना खिलाया. फिर दान दिया और उसके बाद व्रत का पारण किया. इस व्रत को करने से सुमेधा और उसके परिवार की गरीबी दूर हो गई. उनके जीवन सुख, धन, वैभव आदि आ गया. अंत में हरि कृपा से उनको मोक्ष की प्राप्ति हुई.
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