हाल ही में एक खबर आई थी कि पड़ोसी मुल्क नेपाल ने फलों के राजा आम पर अंकुश लगा दिया है यानी भारतीय आम के आयात पर रोक लगा दी है. मगर यह महज एक अफवाह थी. अब नेपाल ने इस पर चुप्पी तोड़ी है. नेपाल ने सफाई में भारतीय आमों पर बैन नहीं लगाने की बात कही है. यहां के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि भारतीय आमों के आयात पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया है. नेपाल ने कहा है कि भारतीय आमों का आयात पहले की तरह ही जारी रहेगा. कृषि मंत्रालय ने अफवाहों से बचने की सलाह दी.
दरअसल, जब से नेपाल में भारतीय आमों पर बैन की खबरें सामने आईं, तब से आम उत्पादकों, व्यापारियों और निर्यातकों के बीच चिंता बढ़ गई थी. मगर बुधवार को वहां के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें ये दावा किया गया था कि नेपाल ने भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. नेपाल ने ऐसी खबरों को गलत और भ्रामक बताया.
भारतीय आमों पर कोई रोक नहीं- नेपालकृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि नेपाल ने भारतीय आम के आयात पर रोक लगा दी है, जो कि पूरी तरह से गलत और भ्रामक है. इसके साथ ही मंत्रालय ने ये भी कहा कि भारत से नेपाल आम भेजना पूरी तरह जारी है. बशर्ते आम भेजने वाले सभी सरकारी नियमों और पौधों की सेहत से जुड़ी शर्तों (जैसे कीटनाशक मुक्त होना) को पूरा करते हों. जो लोग इन नियमों का पालन कर रहे हैं, उन्हें नेपाल में आम बेचने की इजाजत तुरंत मिल रही है.
जून में भेजी गई 266 टन आम की 18 खेपसरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक भारत ने नेपाल को 2005 टन आम की 149 खेपों का निर्यात किया है. अकेले जून महीने में ही अब तक 266 टन आम की 18 खेपें भेजी जा चुकी हैं. नेपाल ने भारतीय आम पर बैन नहीं लगाया है, बस नियमों के तहत जांच के बाद ही आमों को देश में आने दिया जा रहा है.
नेपाल ने कहा- नियमों का पालन जरूरीदरअसल, नेपाल ने हाल ही में अपने कुछ आयात नियमों में संशोधन किया है. अब भारत से आने वाले आमों के लिए हॉट वाटर ट्रीटमेंट यानी गर्म जल उपचार जरूरी कर दिया गया है. भारत इस नए नियम के तहत नेपाल को आम भेजने की तैयारी कर रहा है. भारत ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि नेपाल ने यह नया नियम लागू करने से पहले भारत से कोई बातचीत नहीं की. यह मुद्दा WTO के सामने भी उठा. नेपाल सरकार ने आम व्यापारियों से कहा है कि वे आम के निर्यात पर बैन लगाने की झूठी अफवाहों पर ध्यान न दें.