Shukrawar Vrat Udyapan: शुक्रवार व्रत का उद्यापन कैसे करें? जानें सही विधि वरना नहीं मिलेगा फल!
TV9 Bharatvarsh June 12, 2026 10:42 AM

Vaibhav Lakshmi Vrat Udyapan: हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित किया गया है. इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही इस दिन व्रत रखने का विधान भी है. इस दिन भक्त धन और वैभव की प्राप्ति के लिए वैभव लक्ष्मी का व्रत रखते हैं. मान्यता है कि शुक्रवार को पूजा करने और व्रत रखने से माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.

यह व्रत कम से कम 11 शुक्रवार या फिर 21 शुक्रवार रखा जाता है. व्रत पहले शुक्रवार से शुरू करके 11वें या 21वें शुक्रवार यानि अंतिम शुक्रवार को व्रत का उद्यापन किया जा सकता है. अगर आप भी वैभव लक्ष्मी का व्रत रखते हैं, तो इसके उद्यापन की विधि अवश्य जान लीजिए. मान्यता है कि सही विधि से व्रत का उद्यापन न करने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता.

व्रत उद्यापन की सामग्री

माता लक्ष्मी के शुक्रवार व्रत का उद्यापन करने के लिए पूजा सामग्री एकत्र कर लें. इसमें में सुहाग की सामग्री जैसे कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, साड़ी आदि हों, खीर, वैभव लक्ष्मी व्रत की 7, 11 या 21 पुस्तकें, फूल, माला, फल, अक्षत्, शंख आदि शामिल करें.

शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा
  • शुक्रवार को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं.
  • उस पर मता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें. फिर वैभव लक्ष्मी यंत्र की भी स्थापना करें.
  • अक्षत, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजा करें.
  • सोने या चांदी का सिक्का या फिर किसी एक आभूषण पर चंदन, कुमकुम और अक्षत लगाएं.
  • माता लक्ष्मी को चावल या फिर मखाने की खीर का भोग लगाएं.
  • वैभव लक्ष्मी माता की कथा पढ़ें. फिर माता के मंत्रों का जाप करें.
  • पूजा का समापन आरती से करें.
पूजा के बाद इस तरह करें व्रत का उद्यापन

शुक्रवार व्रत उद्यापन में 7, 11 या 21 सुहागन महिलाओं को बुलाएं. पूजा खत्म होने के बाद उनको प्रसाद वितरित करें. खीर-पूड़ी का भोजन कराएं और उपहार दें. महिलाओं को सुहाग की सामग्री भी दी जा सकती है. इसके बाद उन महिलाओं को कुमकुम का तिलक करें. वैभव लक्ष्मी व्रत की पुस्तक भी उपहार में दें. प्रसाद ग्रहण करके आप भी व्रत को पूरा करें.

व्रत के उद्यापन का महत्व

शुक्रवार या कोई भी व्रत किसी भी अधूरी मनोकामना को या किसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए रखा जाता है. उसके लिए आप 7, 11 या 21 व्रत का संकल्प करते हैं. जब व्रत का उद्देश्य या आपकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है, तब उसका उद्यापन किया जाता है. बिना उद्यापन के व्रत अधूरा माना जाता है.

ये भी पढ़ें: Birthday Celebration: केक काटने के बजाय ऐसे मनाना चाहिए जन्मदिन, जानें कौन सी नहीं करनी चाहिए गलतियां

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.