Adhik Maas Masik Shivratri 2026: आज है अधिकमास की शिवरात्रि, इस शुभ मुहूर्त में करें भोलेनाथ की पूजा
TV9 Bharatvarsh June 13, 2026 10:42 AM

Masik Shivratri 2026 Adhik Maas: हिंदू धर्म में हर मास में एक शिवरात्रि मनाई जाती है. इसको मासिक शिवरात्रि कहा जाता है. शिवरात्रि का पर्व देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित किया गया है. हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है और भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती की विशेष पूजा-अराधना की जाती है.

अधिकमास की मासिक शिवरात्रि बहुत ही विशेष मानी जाती है, क्योंकि ये शिवरात्रि तीन साल में एक बार आती है. आज ज्येष्ठ अधिकमास की मासिक शिवरात्रि है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन से भोलेनाथ और माता पार्वती बहुत प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. आइए जानते हैं कि आज भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

अधिकमास मासिक शिवरात्रि शिव पूजा मुहूर्त (Adhik Maas Masik Shivratri 2026 Puja Muhurat)

मासिक शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में बहुत शुभ मानी जाती है. आज के दिन निशिता काल रात 12 बजे शुरू हो रहा है और 12 बजकर 45 मिनट पर इसका समापन होगा. इस समय में शिव भक्त भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

अधिकमास मासिक शिवरात्रि पूजा विधि (Adhik Maas Masik Shivratri Puja Vidhi)
  • अधिकमास की मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें.
  • शिव जी की पूजा के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और पंचामृत चढ़ाएं.
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद पुष्प चढ़ाएं.
  • इस दौरान 5 प्रकार के अनाज भी चढ़ाएं और सफेद मिठाई का भोग भी लगाएं. फल अर्पित करें.
  • शिवलिंग पर चंदन लगाएं. दीपक जलाकर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें.
  • माता पार्वती की भी पूजा करें.
  • शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें.
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें.
  • 14 जून को यानी कल इस व्रत का पारण करें.
करें शिव जी की आरती (Shiv Ji Aarti Lyrics)

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

जटा में गंगा बहत है,गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा…

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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