Shani Vakra Drishti: शनि की टेढ़ी नजर से भगवान शंकर और गणेश जी भी नहीं बच पाए, जानें क्या है वो कथा
TV9 Bharatvarsh June 13, 2026 11:43 AM

Shani Vakra Drishti: हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि देव को कर्मों का फल देने वाला देवता और न्यायाधीश माना गया है. वहीं ज्योतिष शास्त्र मेंं शनि नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माने गए हैं. शनि देव के बारे में एक बात बहुत प्रचिलित है कि वो जिस पर अपनी व्रक यानी टेढ़ी दृष्टि डालते हैं उस पर उनका प्रकोप पड़ना तय हो जाता है. शनि के वक्र दृष्टि से हर कोई डरता है.

लोग शनिवार के दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए व्रत और उनकी पूजा करते हैं. ताकि वो शनि की टेढ़ी दृष्टि से बचे रहें, लेकिन क्या आप जानते हैं शनि देव की टेढ़ी दृष्टि से स्वयं देवों के देव महादेव और विघ्नहर्ता वो प्रथमपूज्य भगवान गणेश भी नहीं बच पाए थे. आइए जानते हैं वो रोचक कथा.

पौराणिक कथा के अनुसार…

महादेव शनि देव के गुरु भी हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, एक दिन शनि देव कैलाश पर्वत पर अपने गुरु भगवान भोलेनाथ से मिलने पहुंचे. मिलने के बाद उन्होंने महादेव से कहा कि प्रभ! कल मैं आपकी राशि में प्रवेश करने जा रहा हूं. अर्थात मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ेगी. ये सुनते ही शिव जी चौंक गए. फिर वो शनि देव से बोले कि आपकी वक्र दृष्टि मुझ पर कब तक रहेगी.

शनि ने कहा कि प्रभु कल से मेरी वक्र दृष्टि आप पर तीन प्रहर तक रहेगी. अगले दिन शिव जी धरती पर प्रकट हुए और कोकिला वन में हाथी का भेष बदलकर विचरण करने लगे. ताकि उन पर शनि की दृष्टि न पड़े. पूरे दिन भोलेनाथ हाथी का रूप धारण कर धरती पर घूमते रहे. शाम के समय भगवान अपना वास्तविक रूप धारण करके कैलाश पर्वत पर लौटे, जहांं शनि देव उनका इंतजार कर रहे थे.

देव-योनि से पशु योनि में गए शिव जी

शनि देव को देखते ही शिव जी ने कहा कि आपकी वक्र दृष्टि का कोई प्रभाव मुझ पर नहीं हुआ. भोलेनाथ की बात को सुनकर शनि देव ने कहा कि प्रभु! मेरी दृष्टि से न तो कोई देव बच पाए हैं और न ही कोई दानव. आप पर भी मेरी आज पूरे दिन मेरी वक्र दृष्टि का प्रभाव रहा. मेरी वक्र दृष्टि के कारण ही आप आज पूरे दिन देव-योनि से पशु योनि में जाने को मजबूर हुए. ऐसे आप मेरी वक्र दृष्टि के पात्र बने.

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शंकर और मांं पार्वती के पुत्र गणेश जी के जन्मोत्सव पर शनि देव कैलाश पर्वत पर पहुंचे. यहां वो अपनी नजर नीचे रखकर चल रहे थे. तब पार्वती जी ने शनि देव से इसकी वजह पूछी. शनि देव ने बताया कि उनकी दृष्टि से किसी को भी घातक हानि हो सकती है, लेकिन पार्वती जी ने शनि देव का उपहास किया. इस बीच उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को वहां बुलाया.

शनि की दृष्टि के प्रभाव ने कटा गणेश जी का सिर

जैसे ही गणेश जी शनि देव के पास पहुंचे तो उनकी नजर माता पार्वती के पुत्र पर पड़ी. इसके प्रभाव से उनका मस्तिष्क कटकर धड़ से अलग हो गया. यह देखकर पार्वती जी बेहोस हो गईं. होश में आने पर उन्होंने शनि देव को अंग विहिन होने का श्राप दे दिया. पार्वती जी के श्राप के कारण शनि देव के एक पैर में दिक्कत हो गई थी. इससे उनके चलने की गति धीमी हो गई.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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