ऑनलाइन निवेश फ्रॉड पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, चार शहरों में 8 ठिकानों पर छापेमारी
Indias News Hindi June 16, 2026 01:42 AM

कोलकाता, 15 जून . Enforcement Directorate (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ऑनलाइन निवेश फ्रॉड के एक मामले में 1 और 4 जून 2026 को Mumbai , ठाणे, बैंगलोर और गुरुग्राम में आठ जगहों पर तलाशी अभियान चलाया.

तलाशी के दौरान जिन जगहों की जांच की गई, उनमें पेक्स डिजिटल पेमेंट प्राइवेट लिमिटेड, स्मूथपे डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड, किंसेन बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, सेफपे टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (अब मेसर्स टूरस टेक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड), ज्ञान कुबेर लिमिटेड और मेसर्स डिसेंट्रो टेक प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं.

तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं, जिनकी विस्तार से जांच की जा रही है. पीएमएलए, 2002 की धारा 17(1ए) के तहत कुल 129 बैंक अकाउंट्स को फ़्रीज किया गया है, जिनमें 18.4 करोड़ रुपए जमा थे. इसके अलावा तलाशी के दौरान कुछ लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं.

ईडी ने साइबर फ्रॉड के जरिए फर्जी इन्वेस्टमेंट के मामले में पश्चिम बंगाल के बिधाननगर Police कमिश्नरेट के साइबर क्राइम Police स्टेशन में दर्ज कई First Information Report के आधार पर जांच शुरू की. पीड़ितों को social media प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप ग्रुप्स (जैसे स्टॉक फ्रंटलाइन सी4, वैनगार्ड सी7, आदि) के जरिए सीएचसी-एसईएस, एलिस, एस्कॉर्ट्स जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करके इन्वेस्ट करने के लिए लुभाया जाता था.

उन्हें आईपीए और स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट से ज्यादा रिटर्न का लालच दिया जाता था. जब सीधे-सादे इन्वेस्टर्स ने इन्वेस्ट किया तो ऐप्स में ज्यादा रिटर्न दिखाया गया, लेकिन जब इन्वेस्टर्स ने पैसे निकालने की कोशिश की तो पीड़ितों से टैक्स के नाम पर और पैसे की मांग की गई. इस तरह, कई इन्वेस्टर्स को अलग-अलग आरोपियों ने ठगा.

पीएमएलए, 2002 के तहत जांच से पता चला है कि साइबर फ्रॉड से कमाए गए पैसे को ‘म्यूल एंटिटीज,’ चैरिटेबल ट्रस्ट अकाउंट्स और पेमेंट गेटवे कंपनियों के नेटवर्क के जरिए घुमाया और लेयर किया गया था. ट्रांजैक्शन के पैटर्न से पता चलता है कि संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट्स’ से पैसे मिले, कई एंटिटीज के बीच पैसे की अदला-बदली हुई और पेमेंट गेटवे के बीच बड़ी रकम ट्रांसफर की गई, जिससे अपराध से हुई कमाई को छिपाने और लॉन्डरिंग करने का संकेत मिलता है.

जांच में इनमें से कई संस्थाओं के बीच कॉमन डायरेक्टर, कॉमन बिजनेस परिसर, वित्तीय संबंध और फंड ट्रांसफर की बात भी सामने आई है. वहीं, ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है.

डीके/डीकेपी

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