Shagun: शादी-ब्याह में शगुन देने की परंपरा क्यों है? जानिए इसके पीछे की खास वजह
TV9 Bharatvarsh June 16, 2026 07:43 PM

Indian Wedding Traditions: भारतीय संस्कृति में शादी-विवाह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन माना जाता है. यही कारण है कि विवाह से जुड़ी हर रस्म का अपना एक विशेष महत्व होता है. इन्हीं परंपराओं में से एक है शादी-ब्याह में शगुन देने की परंपरा. जब भी किसी घर में विवाह, सगाई या कोई शुभ काम होता है, तो रिश्तेदार, मित्र और परिवार के सदस्य शगुन के रूप में धनराशि, उपहार या कोई भी शुभ चीजें भेंट करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस परंपरा की शुरुआत क्यों हुई और इसका धार्मिक महत्व क्या है?

क्या होता है शगुन?

शगुन का अर्थ होता है शुभ संकेत या मंगल कामना. भारतीय परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत शुभ वस्तुओं और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करने की मान्यता है. विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर दिया गया शगुन नवविवाहित जोड़े के सुखी और सफल वैवाहिक जीवन की कामना का प्रतीक माना जाता है.

धार्मिक दृष्टि से क्यों दिया जाता है शगुन?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ अवसरों पर दान, उपहार और धन देना पुण्यदायी माना गया है. विवाह में दिया गया शगुन केवल आर्थिक सहयोग नहीं होता, बल्कि इसमें आशीर्वाद और शुभकामनाएं भी शामिल होती हैं. माना जाता है कि जब बड़े-बुजुर्ग या प्रियजन शगुन देते हैं तो वे अपने अच्छे विचार और मंगलकामनाएं भी नवदंपति को देते हैं. हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य में दान और दक्षिणा का विशेष महत्व बताया गया है. इसी परंपरा के तहत विवाह समारोहों में शगुन देने की प्रथा सदियों से चली आ रही है.

101, 501 या 1100 रुपये ही क्यों दिए जाते हैं?

आपने अक्सर देखा होगा कि शगुन में 100, 500 या 1000 रुपये की जगह 101, 501, 1100 या 2100 रुपये दिए जाते हैं. इसके पीछे भी एक खास मान्यता है. माना जाता है कि अलग से एक रुपया निरंतर प्रगति और शुभता का प्रतीक होता है. धार्मिक दृष्टि से यह संकेत देता है कि खुशियां और समृद्धि यहीं तक न रूके, बल्कि आगे भी लगातार बढ़ती रहें. इसलिए शगुन में कुछ और यानी एक रुपये जोड़कर राशि देने की परंपरा प्रचलित है.

सामाजिक महत्व भी है खास

शगुन की परंपरा का सामाजिक पक्ष भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. पुराने समय में जब विवाह समारोहों का खर्च उठाना आसान नहीं होता था, तब रिश्तेदार और समाज के लोग शगुन के माध्यम से आर्थिक सहयोग करते थे. इससे परिवार पर पड़ने वाला बोझ कुछ हद तक कम हो जाता था.आज भी यह परंपरा सामाजिक संबंधों को मजबूत काम करती है.

शगुन में क्या-क्या दिया जाता है?

अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार शगुन का स्वरूप अलग-अलग हो सकता है. कई लोग धनराशि देते हैं, जबकि कुछ लोग सोना-चांदी, कपड़े, मिठाई, नारियल, फल या दूसरी उपयोगी चीजें उपहार में देते हैं. इन सभीचीजों को शुभता, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है.

शगुन देते समय किन बातों का रखा जाता है ध्यान?

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार,शगुन देते समय साफ-सुथरे लिफाफे का उपयोग करना शुभ माना जाता है. कई लोग लिफाफे में चावल, हल्दी या एक सिक्का भी रखते हैं. माना जाता है कि इससे शुभ फल में बढ़ोतरी होती है.

ये भी पढ़ें: नया घर लेने का है प्लान? तो भूलकर भी न अनदेखा करें ये वास्तु नियम

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.