Jharkhand News: आधुनिकता के दौर में जहां कई पारंपरिक मान्यताएं समय के साथ बदलती जा रही हैं, वहीं झारखंड के खूंटी जिले में आज भी प्रकृति और लोक आस्था से जुड़ी परंपराएं पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही हैं. अड़की प्रखंड की सीमा पर, तीन दिशाओं से आने वाले रास्तों पर स्थित बुरु बोंगा (पहाड़ देवता) का स्थल आज भी ग्रामीणों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां श्रद्धा से एक पत्थर चढ़ाने पर मनोकामना पूरी होती है और यात्रा भी सुरक्षित रहती है.
ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था. उस समय जंगल से होकर गुजरना आसान नहीं था. अक्सर, जंगली जानवरों का खतरा बना रहता था, इसलिए लोग इस स्थान पर रुककर बुरु बोंगा की पूजा-अर्चना करते थे और सुरक्षित यात्रा की कामना करते थे. धीरे-धीरे यह स्थान लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया.
क्यां है मान्यता?लोगों के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस स्थल से गुजरते समय एक पत्थर चढ़ाया करता है, उसकी यात्रा मंगलमय होती है और जीवन में आने वाली समस्या दूर होती हैं. यही कारण है कि आज भी यहां से गुजरने वाले लोग बिना रुके नहीं निकलते. वे पत्थर चढ़ाकर पहाड़ देवता का आशीर्वाद लेते हैं.
स्थानीय बुजुर्गों ने बताया कि बुरु बोंगा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है. यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और नई पीढ़ी भी इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभा रही हैं.
पारंपरिक रीति-रिवाज से होती है पूजायहां पूजा पूरी तरह पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से की जाती है. विशेष अवसरों पर गांव के लोग सामूहिक रूप से यहां पहुंचते हैं और बुरु बोंगा की पूजा कर सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.