रंभा तीज क्या है, जून में कब ? स्त्रियां क्यों करती है इस दिन शिव-पार्वती की पूजा
जागृति सोनी बरसले June 17, 2026 06:12 AM

Rambha Tritiya 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन देवी स्वरूप स्त्रियां अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं, इसे रंभा तीज व्रत कहा जाता है, जो 17 जून 2026 को किया जाएगा.

मान्यता है कि जो अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की कामना के साथ इस व्रत का पालन करती हैं उनके जीवन में तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति शीघ्र होती है. धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को शुभ फल देने वाला और जीवन में मंगलकारी परिवर्तन लाने वाला बताया गया है. रंभा तीज के दिन पूजा का मुहूर्त क्या है, क्यों इसे रंभा नाम दिया गया.

रंभा तीज 2026 मुहूर्त

 ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 16 जून, मंगलवार के दिन रात में 12 बजकर 53 मिनट पर होगा. अगले दिन यानी 17 जून, बुधवार को रात में 9 बजकर 49 मिनट तक तृतीय तिथि समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 17 जून को ही रंभा तीज का व्रत किया जाएगा.

रंभा तीज नाम कैसे  पड़ा

रंभा को स्वर्गलोक की अत्यंत रूपवान, कलात्मक और आकर्षक अप्सराओं में गिना जाता है. मान्यता है कि उन्होंने भी अपने जीवन में शुभता, सौभाग्य और मनचाहे सुख की प्राप्ति के लिए इस तृतीया तिथि पर श्रद्धा के साथ व्रत और शिव पार्वती जी की पूजा की थी. उनके इसी तप और आराधना से जुड़ी कथा के कारण इस पर्व को रंभा तृतीया या रंभा तीज के नाम से जाना जाने लगा. माना जाता है कि यह व्रत जीवन में सौभाग्य, दांपत्य सुख और शुभ फल की कामना से किया जाता है.

रंभा तीज व्रत पूजा विधि

  • रंभा तीज के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • मन में श्रद्धा रखते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें.
  • पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से करें, ताकि सभी कार्य निर्विघ्न पूरे हों.
  • इसके बाद शिवलिंग और माता पार्वती को जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें.
  • फिर चंदन, अक्षत, पुष्प, बिल्वपत्र, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.
  • माता पार्वती को सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उन्हें चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
  • इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित कर ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ गौर्यै नमः मंत्रों का जप करें. पूजा के दौरान रंभा तीज व्रत कथा का श्रवण या पाठ भी करें.
  • कर्पूर से आरती करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा सौभाग्य की प्रार्थना करें.
  • प्रसाद सभी में बांटें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करें.
  • व्रत का पालन दिनभर नियमपूर्वक करें. यदि निर्जला या पूर्ण उपवास संभव न हो,
  • तो फलाहार कर सकते हैं और दूध या फलों के रस का सेवन कर सकते हैं.

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