5 राज्यों में कैसे काम करता था बच्चा किडनैपिंग गैंग? 9 लाख रुपये तक में होती थी डील… 13 गिरफ्तार
TV9 Bharatvarsh June 18, 2026 07:44 PM

राजधानी दिल्ली में नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम ने इस मामले में अस्पताल संचालक समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने गिरोह के कब्जे से पांच मासूम बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत पांच राज्यों में फैला हुआ था और पिछले डेढ़ साल से सक्रिय था.

पुलिस के अनुसार मामले का खुलासा 5 जून को उस समय हुआ, जब सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशन यूनिट को सूचना मिली कि पहाड़गंज इलाके में एक नवजात बच्चे की डील होने वाली है. सूचना के आधार पर पुलिस ने फर्जी ग्राहक बनकर जाल बिछाया और आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित नाम के तीन आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. उनके पास से चार से पांच दिन का एक नवजात शिशु और 20 हजार रुपये की टोकन मनी बरामद की गई.

निसंतान दंपतियों के बेचते थे बच्चे

आरोपियों से पूछताछ और जांच में पता चला कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि नवजात बच्चों की तस्करी का एक संगठित नेटवर्क था. गिरोह के सदस्य गरीब परिवारों से बेहद कम पैसे में बच्चों को खरीदते थे और फिर उन्हें निसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेच देते थे. कई मामलों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध गोद लेने की प्रक्रिया को वैध दिखाया जाता था.

अस्पताल संचालिका भी गिरोह में शामिल

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की संचालक डॉ. विवेकी की भूमिका को लेकर हुआ. पुलिस का आरोप है कि अस्पताल संचालिका बच्चों को छिपाकर रखने, खरीदारों की तलाश करने और फर्जी मेडिकल एवं जन्म संबंधी दस्तावेज तैयार कराने में मदद करती थी.

MP और हरियाणा से बरामद किए गए बच्चे

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर और हरियाणा के पानीपत से चार अन्य बच्चों को भी बरामद किया. इस तरह कुल पांच बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया. इनमें से चार बच्चे आदिवासी परिवारों से जुड़े बताए जा रहे हैं. सभी बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश कर उनकी देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

कितने पैसों में बेचते थे बच्चे?

जांच में सामने आया है कि आरोपी नवजात बच्चों को कुछ हजार रुपये में खरीदते थे और बाद में उन्हें 6 से 9 लाख रुपये तक में बेच देते थे. पुलिस ने गिरोह के कथित मास्टर सप्लायर कालिया उर्फ सयबाभाई घामर को गुजरात से गिरफ्तार किया है, जो राजस्थान और गुजरात से बच्चों की सप्लाई करता था.

दिल्ली पुलिस का दावा है कि पिछले डेढ़ साल में यह गिरोह 30 से अधिक नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है. पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है. साथ ही पुलिस बरामद बच्चों के जैविक माता-पिता की तलाश कर रही है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.