मुज्तबा खामेनेई ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में पुष्टि की कि ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने पूरी ईमानदारी के साथ इस मुकाम तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन समझौते के लिए सबसे ज्यादा प्रयास अमेरिकी पक्ष की ओर से किए गए.
मुज्तबा खामेनेई ने लिखा, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी निराशा और मजबूरी में इस समझौते को कराने के लिए हर तरह के साधनों का इस्तेमाल किया.”
ईरान के सर्वोच्च नेता ने स्वीकार किया कि इस समझौते को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय अलग थी. उन्होंने कहा, “सैद्धांतिक रूप से मेरी सोच अलग थी, लेकिन मैंने इस शर्त पर अनुमति दी कि ईरान के राष्ट्रपति देश और प्रतिरोध मोर्चे के अधिकारों की रक्षा करेंगे.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका भविष्य में तय सीमा से अधिक मांगें रखने की कोशिश करता है तो ईरान उसके सामने झुकेगा नहीं.
ईरान के सर्वोच्च नेता ने अपने संदेश में कहा कि यदि अमेरिकी पक्ष समझौते की सीमा से बाहर जाकर अतिरिक्त शर्तें थोपने की कोशिश करता है तो ईरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने देशवासियों से धैर्य रखने और तय शर्तों के क्रियान्वयन का इंतजार करने की अपील की.
यह समझौता ज्ञापन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित एक विशेष रात्रिभोज के दौरान हस्ताक्षरित किया गया. यह कार्यक्रम जी-7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित किया गया था. मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते की जानकारी देते हुए कहा कि यह समझौता स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करेगा.
समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर पहले शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने थे. हालांकि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, फिर भी तेहरान ने पुष्टि की है कि जिनेवा में प्रस्तावित बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी.
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद अब अमेरिका और ईरान के पास 60 दिनों का समय है. इस दौरान दोनों देश एक व्यापक और अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करेंगे. यदि बातचीत सफल रहती है तो यह समझौता पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.