Trinetra Ganesh Mandir Ranthambore: देश में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा गणेश जी का ऐसा मंदिर, भक्तों का लगता है तांता
TV9 Bharatvarsh June 19, 2026 07:43 PM

Ranthambore Ganesh Mandir History: सनातन धर्म में किसी भी शुभ अवसर पर सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. आमतौर पर देश के अधिकांश मंदिरों में गणेश जी अकेले या चूहे के वाहन के साथ विराजमान होते हैं, लेकिन राजस्थान के एक प्राचीन और ऐतिहासिक किले में गणेश जी अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं. इतना ही नहीं, यहां भक्त तीन नेत्रों वाले गणेश जी के दुर्लभ रूप के दर्शन भी कर सकते हैं. यह भव्य धार्मिक स्थल रणथंबोर का प्रसिद्ध ‘त्रिनेत्र गणेश मंदिर’ है.

पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर देशभर से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता और किले की भव्यता के बीच बसा यह गणपति मंदिर आध्यात्मिकता और इतिहास का अनूठा संगम है.

त्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास

13वीं शताब्दी में इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक रोचक इतिहास है. उस समय रणथंबोर के शासक राजा हमीर देव गणेश जी के परम भक्त थे. उसी दौरान दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने किले पर आक्रमण कर दिया, जिसके चलते एक लंबा युद्ध छिड़ गया. युद्ध बढ़ने के साथ-साथ किले में अनाज और जरूरी सामग्री का भंडार कम होने लगा. जब चिंतित राजा ने गणेश जी से प्रार्थना की, तो उनके स्वप्न में प्रकट हुए विघ्नेश्वर ने उन्हें आश्वासन दिया, “चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा.”

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अगली सुबह चमत्कारिक रूप से किले की दीवार पर तीन नेत्रों वाले गणेश जी की मूर्ति प्रकट हुई. इसके तुरंत बाद, युद्ध की स्थिति बदल गई और शत्रु सेना पीछे हट गई. आश्चर्यजनक रूप से, किले के खाली अनाज भंडार भी फिर से भर गए. इतिहास कहता है कि इस दिव्य चमत्कार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए राजा हमीर देव ने उसी स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया जहां गणेश जी प्रकट हुए थे.

पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं गणेश जी

यहां गणेश जी का हमें एक ऐसा अनूठा रूप देखने को मिलता है जो देश में कहीं और नहीं दिखता. यहां गणेश जी न केवल तीन नेत्रों वाले रूप में विराजमान हैं, बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ भक्तों को दर्शन भी देते हैं. उनकी पत्नियां रिद्धि और सिद्धि विघ्नराज के बगल में बैठी हैं, वहीं उनके प्रिय पुत्र शुभ और लाभ भी उनके साथ हैं. भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि पूरे परिवार के साथ विराजमान गणपति के दर्शन से परिवार को सुख, धन, बुद्धि और व्यापार में सफलता प्राप्त होती है.

लोग पहला शादी का निमंत्रण गणेश जी को देते हैं

इस मंदिर की एक और अनूठी और सुंदर परंपरा है. देश के किसी भी कोने में जब भी शादी या कोई शुभ अवसर आयोजित होता है, भक्त अपना पहला निमंत्रण पत्र (लग्न पति) डाक या कूरियर के माध्यम से इस त्रिनेत्र गणेश के पते पर भेजते हैं. प्रतिदिन हजारों विवाह पत्र इस मंदिर तक पहुंचते हैं, जिनमें भक्त उनसे अपने घर आकर आशीर्वाद देने का अनुरोध करते हैं.

रणथंबोर के गणेश मंदिर तक ऐसे पहुंचें

इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वालों के लिए सवाई माधोपुर जंक्शन निकटतम रेलवे स्टेशन है. यह भारत के प्रमुख शहरों से ट्रेन द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. रेलवे स्टेशन से लगभग 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित रणथंबोर किले तक पहुंचने के लिए निजी वाहन, टैक्सी और बसें आसानी से उपलब्ध हैं. यह एक बहुत ही विशेष और पवित्र आध्यात्मिक स्थान है, जिसकी यात्रा जीवन में कम से कम एक बार अवश्य करनी चाहिए.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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