तेजी से गर्म हो रहा गंगा का पानी, 16 साल में 1.88°C बढ़ गया तापमान, कितना खतरनाक है ये बदलाव?
TV9 Bharatvarsh June 19, 2026 07:43 PM

देश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली गंगा नदी अब एक नए पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा का पानी लगातार गर्म हो रहा है, जिससे नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, जलजीवों और नदी पर निर्भर करोड़ों लोगों की आजीविका पर खतरा बढ़ता जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. यह जानकारी एक रिसर्च में सामने आई है.

क्यों गर्म हो रहा गंगा का पानी?

वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, घटता नदी प्रवाह और मानव गतिविधियां गंगा के जल तापमान में वृद्धि की प्रमुख वजह बन रही हैं. नदी के पानी के गर्म होने से उसमें घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इससे जैव विविधता भी प्रभावित हो सकती है.

कितना बढ़ा तापमान?

IIT हैदराबाद के हाइड्रोक्लाइमेटिक रिसर्च ग्रुप और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, गंगा के मध्य प्रवाह क्षेत्र में वर्ष 2009 से 2025 के बीच पानी का औसत तापमान करीब 1.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. रिसर्च से जुड़ी वैज्ञानिक डॉ. रेहाना शैक के मुताबिक, पानी के तापमान में केवल एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर उसमें घुली ऑक्सीजन का स्तर लगभग 2.3 प्रतिशत तक कम हो सकता है.

यही ऑक्सीजन मछलियों, जलीय कीटों और अन्य जलजीवों के जीवन के लिए सबसे जरूरी तत्व है. ऑक्सीजन का स्तर घटने से जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ सकता है और कई संवेदनशील प्रजातियां प्रभावित हो सकती हैं.

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के पेयजल, सिंचाई, मत्स्य पालन और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख स्रोत है. ऐसे में पानी के तापमान में लगातार बढ़ोतरी से कृषि, मत्स्य उत्पादन और जल उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है. हिमालयी ग्लेशियरों में बदलाव और मौसम के बदलते पैटर्न भी नदी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं.

कैसे सुधरेंगे हालात?

वैज्ञानिकों ने इस चुनौती से निपटने के लिए कई उपाय सुझाए हैं. इनमें नदी के किनारों पर हरित क्षेत्र बढ़ाना, प्रदूषण को नियंत्रित करना, प्राकृतिक जल प्रवाह बनाए रखना और जल संरक्षण की प्रभावी योजनाओं को लागू करना शामिल है. उनका मानना है कि गंगा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए केवल सफाई अभियान ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे.

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा के बढ़ते तापमान को केवल पर्यावरणीय मुद्दा मानकर नहीं छोड़ा जा सकता. यह जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा विषय है. यदि अभी से दीर्घकालिक रणनीति नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में गंगा बेसिन के करोड़ों लोगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.

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