Sudarshan Chakra: जब विष्णु जी ने कमल की जगह चढ़ा दी अपनी आंख, तब मिला था सुदर्शन चक्र!
TV9 Bharatvarsh June 21, 2026 05:43 PM

Sudarshan Chakra Katha: भगवान विष्णु जगत के पालनहार कहे जाते हैं. एकादशी और गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है. इन दिनों में भगवान विष्णु का व्रत और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. शास्त्रों और पुराणों में एकादशी व्रत को मोक्ष प्रदान करने वाला व्रत माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष और बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है. भगवान विष्णु के पास चार मुख्य अस्त्र हैं, जिन्हें वे अपनी चार भुजाओं में धारण करते हैं.

इसमें सुदर्शन चक्र, कौमोदकी गदा, पाञ्चजन्य शंख और तलवार (नंदन) शामिल है. सुदर्शन चक्र संसार का सबसे शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीहरि विष्णु को सुदर्शन चक्र किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं महादेव ने दिया था. इसके लिए विष्णु जी को महादेव की आराधना करनी पड़ी थी. यही नहीं उन्होंने अपनी एक आंख तक त्याग दी थी. आइए ये रोचक कथा जानते हैं.

पौराणिक कथा के अनुसार…

पौराणिक कथा के अनुसार, संसार में अधर्म बढ़ रहा था. सृष्टि को एक अस्त्र की आवश्यकता थी जो बहुत शक्तिशाली हो, जिसका सामना कोई न कर सके. तब भगवान विष्णु ने महादेव की आराधना करने का फैसला किया. भगवान विष्णु, शिव जी का पूजन करने के लिए काशी आए. यहां मणिकार्णिका घाट पर स्नान किया. इसके बादउन्होंने निर्णय लिया कि मैं महादेव के चरणों में एक हजार कमल के फूल अर्पित करुंगा.

भगवान विष्णु ने महादेव की अराधना प्रारंभ कर दी. इसी बीच शिव जी ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कमल का फूल कम कर दिया, चूंकि विष्णु जी को महादेव को एक हजार कमल के फूल चढ़ाने थे. जब उन्होंने देखा कि कमल का एक फूल कम है, तो बोले कि मेरी आंखें ही कमल के समान हैं, इसलिए मुझे कमलनयन और पुण्डरीकाक्ष कहते हैं. एक कमल के फूल की जगह मैं महादेव को अपनी एक आंख अर्पित कर देता हूं.

महादेव ने प्रदान किया सुदर्शन चक्र

इसके बाद महादेव भगवान भगवान विष्णु की पूजा और इस त्याग के फैसले से अति प्रसन्न हुए. भगवान शिव ने प्रकट होकर श्रीहरि विष्णु से कहा कि हे विष्णु! आपके समान संसार में कोई दूसरा मेरा भक्त नहीं है. इसके बाद भगवान ने विष्णु जी को सुदर्शन चक्र प्रदान किया और कहा कि ये यह चक्र राक्षसों का विनाश करेगा. यही नहीं तीनों लोकों में इसकी बराबरी कोई अस्त्र नहीं कर सकेगा.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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