50 दिन से जल रहा बोलिविया, खाने-पीने का संकट; क्यों लगानी पड़ी 90 दिन की इमरजेंसी?
TV9 Bharatvarsh June 21, 2026 06:43 PM

दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया में पिछले करीब 50 दिनों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं. हालात बिगड़ने के बाद राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज ने पूरे देश में 90 दिनों के लिए इमरजेंसी लगा दी है. प्रदर्शन और सड़क जाम हटाने के लिए सेना की भी तैनाती की गई है. आंदोलन की शुरुआत राष्ट्रपति पाज के इस्तीफे की मांग को लेकर हुई थी. लेकिन धीरे-धीरे इसमें महंगाई, ईंधन की कीमतें, जमीन से जुड़े कानून और आर्थिक समस्याएं भी शामिल हो गईं.

प्रदर्शनकारियों ने कई प्रमुख सड़कों पर बैरिकेड और अवरोध लगा दिए, जिससे देशभर में खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो गई. विरोध की सबसे बड़ी वजह सरकार का फ्यूल सब्सिडी खत्म करने का फैसला था. सरकार ने यह कदम देश के बढ़ते वित्तीय घाटे, अमेरिकी डॉलर की कमी और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ चल रही बातचीत के कारण उठाया था.

भूमि सुधार कानून का भी विरोध

इस कानून में जमीन को कर्ज के लिए गिरवी रखने की अनुमति दी गई थी. लोगों को डर था कि इससे बड़ी कंपनियां जमीन पर कब्जा कर सकती हैं. सरकार ने बाद में फ्यूल की कीमतों को नियंत्रित करने और भूमि सुधार से जुड़े कुछ फैसलों को वापस लेने की कोशिश की, लेकिन तब तक आंदोलन तेज हो चुका था. कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 365 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 37 लोग घायल हुए हैं. सड़क जाम और अव्यवस्था के कारण इलाज में देरी हुई, जिससे 17 लोगों की मौत होने की भी खबर है. मजदूरों, ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों, शिक्षकों, ग्रामीण समुदायों और अन्य मजदूर संगठनों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया. उनका कहना है कि सरकार महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और आर्थिक संकट को संभालने में नाकाम रही है.

पूर्व राष्ट्रपति ने भी आंदोलन का समर्थन किया

पूर्व राष्ट्रपति इवो मोरालेस के समर्थकों ने भी आंदोलन का समर्थन किया और सड़कें जाम कीं. इससे भोजन, ईंधन और मेडिकल सामान की कमी और बढ़ गई. राष्ट्रपति पाज ने कहा कि सड़क बंद होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है. इसलिए सेना और बुलडोजर की मदद से रास्ते खोले जाएंगे. सरकार का दावा है कि यह कदम देश में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उठाया गया है. हालांकि कई लोग इसका समर्थन कर रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अब भी राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

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