
नई दिल्ली, 21 जून . कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे खुले पत्र पर सियासत तेज हो गई है. इसको लेकर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रियांक खड़गे की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें आरएसएस के इतिहास को पढ़ना चाहिए. खड़गे को ऐसी मांग करने का अधिकार कहां से मिला?
दरअसल, प्रियांक खड़गे ने आरएसएस चीफ मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के सोर्स, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे थे.
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने से कहा, “हमने उनसे पूछा है कि संविधान के किस प्रावधान में यह लिखा है कि किसी संगठन को काम करने के लिए रजिस्टर होना जरूरी है. ऐसी कोई कानूनी जरूरत नहीं है.”
आलोक कुमार ने कहा, “प्रियांक खड़गे से पूछा गया कि किस कानून के तहत ऐसे संगठनों का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लेकिन वे जवाब नहीं दे पाए. संविधान का अनुच्छेद 19(1)(सी) हर भारतीय को अपनी मर्जी से संगठन और संस्थाएं बनाने का अधिकार देता है. यह अधिकार खुद संविधान ने दिया है.”
आलोक कुमार ने कहा कि यह अधिकार हमको संविधान के तहत मिलता है. साल 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगा था. इसके बाद Government ने संघ से संविधान देने के लिए कहा और आरएसएस ने ऐसा ही किया. इसके बाद Government ने प्रतिबंध हटाया. हम अपने संविधान के तहत चलते हैं.
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि तत्कालीन Prime Minister इंदिरा गांधी ने सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरु जी’ के देहांत पर Lok Sabha में श्रद्धांजलि दी थी. उन्होंने श्रीगुरु जी को अपने विचारों पद दृढ़ रहने वाला एक अद्भुत व्यक्तित्व बताया था. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1962 में चीन के हमले के समय संघ के कार्यों को देखते और समझते हुए सम्मान स्वरूप 26 जनवरी की परेड में संघ को शामिल किया था. इसलिए प्रियांक खड़गे को इतिहास पढ़ लेना चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रियांक को यह भी जानकारी लेनी चाहिए कि संविधान के अंतर्गत संघ अपने सदस्यों से बाहर के किसी व्यक्ति से काम का पैसा नहीं लेता है. गुरु दक्षिणा होती है और वह भी केवल स्वयंसेवक कर सकता है. इसीलिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस ने एक सर्कुलर निकाला, जिसके तहत कहा गया कि आरएसएस की आय टैक्सेबल नहीं है. हाईकोर्ट कहता है कि आरएसएस की आय टैक्सेबल नहीं है. ऐसे में रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि मैं कहूंगा कि प्रियांक खड़गे को या तो ज्ञान नहीं है या वह तथ्यों को जानते समझते हुए दुर्भावना से इस प्रकार का दुष्प्रचार कर रहे हैं.
–
एएसएच/