Ardra Nakshatra 2026: ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है. सूर्य का एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश केवल ज्योतिष के नजरिए से ही नहीं, बल्कि मौसम और कृषि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. आज यानी 22 जून की रात सूर्यदेव आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. मान्यता है कि सूर्य के इस नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगते हैं और मानसून की गतिविधियां भी तेज होने लगती हैं. यही वजह है कि आर्द्रा नक्षत्र का समय धार्मिक और कृषि परंपराओं में खास स्थान रखता है. ज्योतिष के नजरिए जानते हैं ये दिन क्यों खास माना जाता है.
कब तक आर्द्रा नक्षत्र में रहेंगे सूर्य?पंचांग के अनुसार, सूर्यदेव22 जून 2026 की रात 8 बजकर 27 मिनट पर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 6 जुलाई 2026 की रात 9 बजकर 48 मिनट तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इस दौरान कई शुभ योगों का भी संयोग बन रहा है, जिससे इस अवधि का महत्व और बढ़ जाता है. ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय हस्त नक्षत्र, वरीयान योग, सुकृति योग और यात्री जयद योग का विशेष संयोग बन रहा है. जिसे धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जा रहा है.
क्यों खास माना जाता है आर्द्रा नक्षत्र का पहला चरण?आर्द्रा नक्षत्र के पहले चरण को विशेष महत्व दिया जाता है. 22 जून से 25 जून तक की अवधि को कई परंपराओं में अलग नजरिए से देखा जाता है. मान्यता है कि इस समय धरती रजस्वला अवस्था में होती है. इसी कारण पुराने समय से इस अवधि में खेतों की जुताई या नए कृषि काम शुरू करने से बचने की परंपरा चली आ रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी किसान इस समय भूमि को आराम देते हैं. साथ ही अच्छी बारिश और भरपूर फसल की कामना के लिए भूमि पूजन और देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं.
मानसून से भी जुड़ा है आर्द्रा नक्षत्रभारतीय कृषि परंपरा में आर्द्रा नक्षत्र का संबंध मानसून से जोड़ा जाता है. माना जाता है कि सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के बाद वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने लगती है. यही कारण है कि किसान इस समय मौसम की दिशा और बारिश के संकेतों पर विशेष ध्यान देते हैं. हालांकि मौसम की वास्तविक स्थिति कई वैज्ञानिक कारणों पर निर्भर करती है, लेकिन लोक परंपराओं में आर्द्रा नक्षत्र को मानसून के आगमन का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है.
खीर और दाल की पूड़ी बनाने की परंपरा क्यों है?आर्द्रा नक्षत्र के दौरान खान-पान से जुड़ी कुछ विशेष परंपराएं भी देखने को मिलती हैं. कई परिवारों में इस समय खीर और दाल की पूड़ी बनाने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह भोजन शुभ माना जाता है और इसे देवी-देवताओं को अर्पित करने के बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इस परंपरा का पालन करते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आने वाला समय शुभ रहता है.
ज्योतिष में आर्द्रा नक्षत्र का महत्वज्योतिष शास्त्र में आर्द्रा नक्षत्र को बहुत ही शक्तिशाली और असरदार नक्षत्र माना गया है. आकाशमंडल में आने वाले 27 नक्षत्रों में से यह छठा नक्षत्र है. इस नक्षत्र के स्वामी राहु देव हैं और इसके देवता भगवान शिव के उग्र रूप रुद्र माने जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आर्द्रा नक्षत्र का यह समय पूजा-पाठ, जप और दान-पुण्य के लिए अच्छा माना जाता है. कई श्रद्धालु इस दौरान भगवान सूर्य, भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं की विशेष पूजा करते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और मानसिक शांति लेकर आती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.