‘अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी...’, श्रीनगर में LG मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद बोले शशि थरूर
आसिफ कुरैशी, एबीपी न्यूज़ June 22, 2026 03:12 PM

पार्टी के रुख से अलग राय रखते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने रविवार (21 जून, 2026) को जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार की शांति कोशिशों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के दौरे के दौरान उन्हें सकारात्मक चीजें महसूस हुईं और केंद्र शासित प्रदेश में हालात सामान्य होने की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है.

श्रीनगर लोक भवन में उपराज्यपाल से मिले थरूर

नालंदा डायलॉग्स के लिए जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के प्रवास पर गए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोक भवन में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ये बातें कहीं. यह कांग्रेस पार्टी के उस रुख से अलग था, जिसमें वह पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के शांतिपूर्ण जम्मू-कश्मीर के दावों पर सवाल उठाती रही है.  

एक्स पोस्ट में क्या बोले कांग्रेस सांसद शशि थरूर?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने X पोस्ट में कहा, ‘श्रीनगर में! आज लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ एक शानदार मुलाकात का सौभाग्य मिला. हमने राज्य के हालात और सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही उत्साहजनक प्रगति पर चर्चा की.’ हालांकि, शशि थरूर ने दावा किया कि लोक भवन के दौरे के दौरान उन्होंने सकारात्मक पहल देखी, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अभी तक थरूर के दावों पर कोई बयान नहीं दिया है. 

उन्होंने आगे कहा, ‘जब मैं वहां पहुंचा, तो वे कश्मीरी लेखक संघ और महिला संगठन के अध्यक्ष से बातचीत कर रहे थे - यह एक सकारात्मक पहल थी, जिसका मैंने स्वागत किया. कई चुनौतियां अभी भी हैं और बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन मुलाकात के बाद मुझे काफी समय बाद सकारात्मकता महसूस हुई.’

डायलॉग में संबोधन में क्या बोले थरूर?

श्रीनगर नालंदा डायलॉग में अपने संबोधन के दौरान, थरूर ने ‘पर्यटन एक पुल के रूप में: कश्मीर में शांति और शासन की नई सोच’ विषय पर बात की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यटन आर्थिक अवसरों, शांति और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मेहमाननवाजी को प्रदर्शित करने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम का काम करता है.

मेल-मिलाप पर जोर देते हुए शशि थरूर ने विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय की वापसी को उम्मीद के प्रतीक और शांति के एक मजबूत संदेश के रूप में रेखांकित किया और कहा कि असली जीत आगे बढ़ने में ही है. 

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