ब्रिटेन में एक ऐसा उपचुनाव हो रहा है, जिस पर पूरे देश की राजनीति की नजर टिकी हुई है. मेकरफील्ड सीट के करीब 76 हजार वोटर, जो देश की आबादी का लगभग 0.1% हैं, कीर स्टारमर के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं. यहां से लेबर पार्टी के लोकप्रिय नेता एंडी बर्नहम चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्हें भविष्य का संभावित प्रधानमंत्री भी माना जा रहा है. अगर एंडी बर्नहम यह सीट जीत जाते हैं, तो माना जा रहा है कि वे लेबर पार्टी के नेतृत्व के लिए कीर स्टारमर को चुनौती दे सकते हैं. यही वजह है कि एक साधारण दिखने वाला यह उपचुनाव अब ब्रिटेन की राजनीति का सबसे बड़ा मुकाबला बन गया है.
एंडी बर्नहम की वापसी क्यों है इतनी अहम?ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम को ब्रिटेन के सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिना जाता है. हालांकि वह फिलहाल संसद सदस्य नहीं हैं, इसलिए लेबर पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में शामिल नहीं हो सकते. मेकरफील्ड सीट खाली होने के बाद उन्हें यहां से उम्मीदवार बनाया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बर्नहम संसद पहुंच जाते हैं, तो वह प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व को खुली चुनौती दे सकते हैं.
स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के कमजोर प्रदर्शन और सरकार से कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हुई है. ऐसे में बर्नहम की जीत केवल एक सीट की जीत नहीं बल्कि लेबर पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बदलने का काम कर सकती है.
लेबर पार्टी पर बढ़ता दबावकरीब दो साल पहले भारी बहुमत से सत्ता में आने वाले कीर स्टारमर की लोकप्रियता लगातार घटती बताई जा रही है. आलोचकों का कहना है कि उन्होंने जिस बदलाव का वादा किया था, उसे स्पष्ट रूप से लागू नहीं कर पाए. कई नीतियों पर यू-टर्न और सीमित सरकारी खर्च की वजह से पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है.
इसी बीच नाइजेल फराज की पार्टी रिफॉर्म यूके तेजी से मजबूत हुई है. राष्ट्रीय जनमत सर्वेक्षणों में भी रिफॉर्म यूके को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. मेकरफील्ड में भी रिफॉर्म उम्मीदवार रॉबर्ट केन्यन लेबर के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं. स्थानीय चुनावों में विगन क्षेत्र की 25 में से 24 सीटों पर रिफॉर्म यूके की जीत ने लेबर पार्टी की चिंता और बढ़ा दी है.
क्यों खास है मेकरफील्ड का यह चुनाव?मेकरफील्ड उत्तरी इंग्लैंड का एक पारंपरिक लेबर गढ़ माना जाता है. यह इलाका दशकों तक कोयला खदानों, स्टील उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर रहा, जहां मजदूर वर्ग की बड़ी आबादी लेबर पार्टी को समर्थन देती रही है. लेकिन पिछले कुछ दशकों में यहां की अर्थव्यवस्था बदल चुकी है और अब रोजगार के मुख्य क्षेत्र निर्माण, खुदरा कारोबार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं हैं.
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह एक “क्लासिक पोस्ट-इंडस्ट्रियल” क्षेत्र है, जहां बुजुर्ग आबादी ज्यादा है, घरों का स्वामित्व अधिक है और ब्रेक्जिट को मजबूत समर्थन मिला था. यहां के कई मतदाता पारंपरिक राजनीति से निराश दिखाई देते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि लेबर पार्टी अपनी जड़ों से दूर हो गई है, जबकि कुछ मतदाता रिफॉर्म यूके की आव्रजन विरोधी राजनीति की ओर आकर्षित हो रहे हैं. यही वजह है कि यह चुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं बल्कि ब्रिटेन की बदलती राजनीति का संकेतक बन गया है.
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