45 गांवों की हुंकार! राशन-पानी लेकर धमतरी कलेक्ट्रेट पहुंचे हजारों आदिवासी, 6 घंटे तक डटे रहे… आखिर क्यों?
TV9 Bharatvarsh June 23, 2026 11:43 PM

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को हजारों आदिवासी ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया. सिहावा विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसे करीब 45 गांवों के लोग किसान संघर्ष समिति और जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे और घंटों तक प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई.

ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के 75 साल बाद भी उनके गांव विकास की मुख्यधारा से कोषों दूर हैं. कई बार प्रशासन और सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है. प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है, जिससे विशेष रूप से बारिश के मौसम में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

ग्रामीणों को रोकने के लिए की गई बैरिकेडिंग

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने जिले में कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी, लेकिन ग्रामीणों की भारी भीड़ के सामने ये प्रयास नाकाम साबित हुए. हजारों की संख्या में पहुंचे आदिवासी कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर करीब छह घंटे तक डटे रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे.

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज साक्षी, संजय नेताम और खूबलाल ध्रुव ने कहा कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने के कारण विकास कार्य वर्षों से प्रभावित हैं. वन क्षेत्र होने के चलते कई योजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद भी जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाता. इसका खामियाजा यहां रहने वाले हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है.

कलेक्टर ने सुनी समस्याएं

वहीं प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. हालात को देखते हुए धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं. बातचीत के बाद प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बनी.

कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए विशेष नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर क्षेत्र में पुल-पुलिया निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है और कुछ सड़कों के लिए आवश्यक स्वीकृतियां ली जा रही हैं. जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा.

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

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