बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी के कथित पुलिसिया एनकाउंटर के बाद पूरा बवाल मचा हुआ. खुद एनडीए के नेता भी अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने लगे हैं. मामला तुल पकड़ते ही इस मामले में 6 पुलिस वालों को सस्पेंड भी किया जा चुका है. उधर बिहार पुलिस के एडीजी भी मान चुके हैं कि इस मामले में गलती हुई है.
सीएम सम्राट चौधरी पास ही गृह विभाग का भी जिम्मा है. ऐसे में कानून-व्यवस्था और एनकाउंटर के लिए विपक्ष की तरफ से सीधे उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. इसके अलावा उनकी खुद की पार्टी के नेताओं ने इस एनकाउंटर पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं. वह भी सम्राट चौधरी के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है. फिलहाल, वह इस मामले में अब तक साइलेंट मोड में हैं. हालांकि, उन्होंने इस कथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है.
अपनी ही पुलिस के रवैये के चलते बैकफुट पर सम्राट चौधरीभरत तिवारी के एनकाउंटर के कुछ दिन पहले ही सीएम सम्राट चौधरी ने अपराध को लेकर कड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि ‘पीड़ित बच्चियों या मृतक बच्चियों की तेरहवीं से पहले अपराधी की फोटो पर माला पहना दीजिए. ऐसे मामलों में तत्काल केस दर्ज कर, तुरंत चार्जशीट दाखिल की जाए और कोर्ट के माध्यम से अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाए. लेकिन भोजपुर में पुलिस ने भरत तिवारी के साथ जो रवैया अपनाया, उसके चलते सम्राट चौधरी को बैकफुट पर आना पड़ा.
राजनीतिक विश्वसनीयता का मामला बन गया है भरत तिवारी का मामलाअब भरत तिवारी का एनकाउंटर सिर्फ एक पुलिस मुठभेड़ तक सीमित नहीं रहा. यह कथित फर्जी एनकाउंटर, पुलिस जवाबदेही, न्यायिक जांच और राजनीतिक विश्वसनीयता का मामला भी बन गया है. दरअसल, परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि भरत तिवारी को जानबूझकर गोली मारी गई. उसने आत्मसमर्पण कर दिया था. हालांकि, पुलिस की कहानी इससे उलट है. वह अपनी कार्रवाई को सही ठहराती रही. लेकिन, घटना के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के बाद पुलिस की कहानी पर सवाल उठने शुरू हो गए.
बिहार में ब्राह्मणों की आबादी 3.66 प्रतिशतसाल 2023 में बिहार में हुए जाति आधारित जनगणना के मुताबिक राज्य में ब्राह्मणों की आबादी कुल जनसंख्या का करीब 3.65 प्रतिशत है. अगर नंबर में इसे कन्वर्ट करें तो बिहार की कुल आबादी तकरीबन 13.28 करोड़ है. ऐसे में राज्या में 3.65 प्रतिशत के हिसाब से ब्राह्मणों की जनसंख्या लगभग 48 लाख है.
क्या बीजेपी से दूर होंगे ब्राह्मण?बिहार में ब्राह्मण समाज बीजेपी का बीजेपी का पारंपरिक वोटर माना जाता है. लेकिन इस कथित एनकाउंटर के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ब्राह्मण समाज स्रमाट चौधरी की सरकार से दूर खिसक सकता है. इसके अलावा यह भी चर्चा है क्या भरत तिवारी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों, विरोध प्रदर्शनों का असर बीजेपी के खिलाफ दूसरे राज्यों में पड़ सकता है. क्या यही वजह है एनडीए सरकार के कुछ नेता जो ब्राह्मण समाज से आते हैं, उन्होंने इस एनकाउंटर की निंदा करते हुए भरत तिवारी और उसके परिवार के पक्ष में अपनी प्रतिक्रिया दी.
राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे समुदाय के मतदान व्यवहार में बड़े बदलाव के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी. लेकिन भरत तिवारी का कथित एनकाउंटर और बिहार पुलिस की कार्यशैली सम्राट चौधरी के लिए जरूर गले की फांस बन गई है.