जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. एक बार फिर से उन्होंने ऐसा बयान दिया है जिसको लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. उनका कहना है कि 1803 में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था,, तब देश की आजादी के लिए जिहाद का आह्वान किया गया था. इसलिए देश को आजाद कराने के लिए जिहाद करना हर मुसलमान का फर्ज है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मुसलमानों ने देश के लिए बहुत किया लेकिन बदले में उन्हें आज क्या मिल रहा है.
दरअसल मौलाना सैयद अरशद मदनी मंगलवार (23 जून) को उत्तराखंड पहुं के हरिद्वार जिले के कलियर पहुंचे थे. यहां वो राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने उलेमा, हाफिज और मुस्लिम समुदाय के लोगों को संबोधित किया. उन्होंने सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता सहित राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों को उठाया.
‘जिहाद करना हर मुसलमान का फर्ज’अपने संबोधन में उन्होंने आजादी के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि 1803 में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब आजादी के लिए जिहाद का आह्वान किया गया था. इसलिए देश को आजाद कराने के लिए जिहाद करना हर मुसलमान का फर्ज है. उन्होंने कहा कि गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए जिहाद करना हर मुसलमान का कर्तव्य था. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन मदरसों से शुरू हुआ था और जो लोग इसके इतिहास को नहीं जानते,वो अज्ञानी हैं.
‘आजादी में मुसलमानों का योगदान’देश के स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों और मस्जिदों के महत्व को रेखांकित करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा केंद्र सरकार इन्हीं मस्जिदों को ध्वस्त कर रही है. उन्होंने कहा कि देश की आजादी और तरक्की में मुसलमानों का योगदान रहा है.
मोदी सरकार पर साधा निशानाउन्होंने कहा ‘आजादी के बाद सत्ता में बैठे लोगों ने मुसलमानों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. एक के बाद एक सरकारों ने मुस्लिम समुदाय को दंगों और अशांति में उलझाए रखा, लेकिन मौजूदा सरकार न केवल मुसलमानों की बल्कि इस्लाम की ही विरोधी है. हमारे धार्मिक स्थलों को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त किया जा रहा है’.
‘देश बदले में मुसलमानोंआज क्या दे रहा’मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि देश केवल प्रेम और सद्भाव के माध्यम से ही चल सकता है, फिर भी आज मस्जिदों और मदरसों को ध्वस्त किया जा रहा है. साथ ही मुसलमान भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने का शिकार हो रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि मुसलमानों ने देश को क्या दिया है और देश बदले में उन्हें आज क्या दे रहा है.
‘नफरत की राजनीति का त्याग करें’मौलाना मदनी ने कहा कि बिना प्रेम और स्नेह के कोई राष्ट्र जीवित नहीं रह सकता. लोगों आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आप अपने देश से प्यार करते हैं, तो नफरत की राजनीति का त्याग करें और प्रेम की राजनीति को जिंदा रखें. उन्होंने कहा कि प्यार मोहब्बत और आपसी सौहार्द की राजनीति को बढ़ावा देना चाहिए. उन्होंने मुसलमानों से कहा कि वो सभी के प्रति प्रेम और स्नेह के साथ रहें, क्योंकि यही देश के प्रति सच्ची निष्ठा का पैमाना है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने में विफल रहने का अर्थ है कि वह व्यक्ति राष्ट्र के प्रति वफादार नहीं है.
बाढ़ पीड़ितों की मदद का दिया उदाहरणमदनी ने पश्चिम बंगाल में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उस समय हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों को भोजन उपलब्ध कराया था. उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा समाज सेवा के कार्यों में आगे रहा है. उन्होंने कहा कि आज उन्हीं मुसलमानों के घर ध्वस्त किए जा रहे हैं और मदरसे बंद किए जा रहे हैं.