देश के सर्राफा बाजार में 23 जून 2026 को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जब सोना और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। विशेष रूप से चांदी की कीमतों में आई तेज कमी ने बाजार को चौंका दिया है। एक ही कारोबारी दिन में चांदी ₹10,566 प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई, जबकि सोने की कीमत में भी ₹2,522 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पिछले कुछ महीनों के दौरान दोनों बहुमूल्य धातुओं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी थीं और निवेशकों के बीच लगातार चर्चा का विषय बनी हुई थीं।
भारतीय बुलियन एवं ज्वैलर्स संघ के ताजा आंकड़ों के अनुसार एक किलोग्राम चांदी का भाव घटकर ₹2.27 लाख पर पहुंच गया है। इससे पहले सोमवार को चांदी ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम रह गई, जो पिछले कारोबारी सत्र में ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव, निवेशकों की मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धातुओं की मांग में नरमी इस गिरावट की प्रमुख वजहें हैं।
सोना और चांदी की कीमतों में आई इस अचानक कमजोरी ने निवेशकों, ज्वैलर्स और आम ग्राहकों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां निवेशक भविष्य की दिशा को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं, वहीं शादी-विवाह और त्योहारों की तैयारियों में लगे ग्राहकों के लिए यह गिरावट राहत भरी खबर मानी जा रही है।
एक महीने में सोना ₹10,748 और चांदी ₹36,015 तक सस्तीजून महीने के दौरान सर्राफा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। महीने की शुरुआत में जो तेजी दिखाई दी थी, वह अब काफी हद तक समाप्त होती नजर आ रही है। आंकड़ों के अनुसार 1 जून 2026 को 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम थी। वर्तमान स्तर की तुलना करें तो सोना एक महीने के भीतर ₹10,748 तक सस्ता हो चुका है।
इसी प्रकार चांदी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जून की शुरुआत की तुलना में चांदी ₹36,015 प्रति किलोग्राम तक टूट चुकी है। यह गिरावट केवल निवेशकों के लिए ही नहीं बल्कि औद्योगिक उपयोगकर्ताओं और आभूषण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चांदी का उपयोग केवल निवेश और आभूषणों में ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सौर ऊर्जा परियोजनाओं और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतों में असामान्य तेजी देखने को मिली थी, जिसके बाद अब बाजार स्वाभाविक संतुलन की ओर लौटता दिखाई दे रहा है। कई निवेशकों ने रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली शुरू की, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा और गिरावट का सिलसिला तेज हो गया।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना और चांदी अभी भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां बनी हुई हैं। हालांकि वर्तमान गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन धातुओं में निवेश पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं माना जा सकता।
रिकॉर्ड ऊंचाई से भारी टूटे सोना और चांदी के भाववर्ष 2026 की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों ने अभूतपूर्व तेजी दर्ज की थी। 29 जनवरी 2026 को सोने ने अपने इतिहास का सर्वोच्च स्तर छूते हुए ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा पार कर लिया था। उस समय वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग ने सोने की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया था।
हालांकि जनवरी के अंत में बने उस रिकॉर्ड के बाद से सोना लगातार दबाव में रहा है। वर्तमान कीमतों की तुलना करें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से लगभग ₹31,333 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। यह गिरावट दर्शाती है कि बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग पहले की तुलना में कमजोर हुई है और निवेशकों का रुझान अन्य परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है।
चांदी की स्थिति और भी अधिक उल्लेखनीय रही है। 29 जनवरी 2026 को चांदी ने ₹3.86 लाख प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर छुआ था। यह चांदी के इतिहास का अब तक का सबसे ऊंचा मूल्य माना जाता है। लेकिन उसके बाद शुरू हुई गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया।
वर्तमान कीमत ₹2.27 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसका अर्थ है कि केवल 145 दिनों में चांदी ₹1.59 लाख प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो चुकी है। इतनी बड़ी गिरावट बहुमूल्य धातुओं के बाजार में दुर्लभ मानी जाती है और इसने निवेशकों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
वैश्विक परिस्थितियों का बाजार पर बढ़ता प्रभावसोना और चांदी की कीमतें केवल घरेलू मांग और आपूर्ति से निर्धारित नहीं होतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी इन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिका, ईरान और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता पैदा की थी।
जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, राजनीतिक तनाव या आर्थिक संकट जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, निवेशक सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। इसी कारण वर्ष की शुरुआत में इन धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। लेकिन हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव कुछ हद तक कम हुआ है, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग में कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों की नीतियां भी सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। निवेशक अब जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर लौट रहे हैं, जिसके कारण बहुमूल्य धातुओं में दबाव दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलता है। इसलिए आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक सोना और चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आयात शुल्क बढ़ने के बाद भी क्यों गिरे भावहाल ही में केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर शुल्क बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। सरकार ने आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य विदेशी खरीद को नियंत्रित करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना बताया गया है।
सरकार ने सोने पर 10 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क और 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर लगाया है। इस प्रकार कुल प्रभावी कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है। दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2024 के बजट में इसी शुल्क को घटाकर 6 प्रतिशत किया गया था।
सामान्य परिस्थितियों में आयात शुल्क बढ़ने से कीमतों में वृद्धि की संभावना रहती है, लेकिन वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी इतनी अधिक है कि उसका प्रभाव आयात शुल्क वृद्धि से भी बड़ा साबित हुआ है। परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट जारी रही।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी बनी रहती है तो आयात शुल्क में वृद्धि का प्रभाव सीमित रह सकता है। हालांकि दीर्घकाल में यह शुल्क घरेलू कीमतों को समर्थन प्रदान कर सकता है।
अलग-अलग शहरों में क्यों बदल जाती हैं सोने की कीमतेंदेश के विभिन्न शहरों में सोने की कीमतों में अंतर दिखाई देता है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं। सबसे पहला कारण परिवहन और सुरक्षा लागत है। सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च आता है, जो अंतिम कीमत में शामिल हो जाता है।
दूसरा कारण स्थानीय मांग और आपूर्ति की स्थिति है। दक्षिण भारत में सोने की खपत देश के कुल उपभोग का लगभग 40 प्रतिशत मानी जाती है। वहां बड़ी मात्रा में खरीदारी होने के बावजूद स्थानीय बाजार की परिस्थितियां कीमतों को प्रभावित करती हैं।
तीसरा कारण स्थानीय सर्राफा संघों की भूमिका है। विभिन्न राज्यों और शहरों के सर्राफा संगठन स्थानीय मांग, उपलब्धता और व्यापारिक परिस्थितियों के आधार पर कीमतों का निर्धारण करते हैं। यही वजह है कि एक ही दिन में अलग-अलग शहरों के भावों में अंतर दिखाई देता है।
इसके अतिरिक्त ज्वैलर्स द्वारा खरीदे गए पुराने स्टॉक की लागत भी बिक्री मूल्य को प्रभावित करती है। यदि किसी व्यापारी ने ऊंचे भाव पर सोना खरीदा है तो वह कीमतों में गिरावट आने के बावजूद तुरंत बहुत कम कीमत पर बिक्री नहीं कर सकता।
सोना खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यानविशेषज्ञों का कहना है कि सोना खरीदते समय ग्राहकों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए। सबसे पहले केवल प्रमाणित और हॉलमार्कयुक्त सोना ही खरीदना चाहिए। भारतीय मानक ब्यूरो का हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी माना जाता है।
खरीदारी से पहले सोने की उस दिन की कीमत विभिन्न स्रोतों से अवश्य जांचनी चाहिए। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव अलग-अलग होते हैं, इसलिए ग्राहक को शुद्धता के अनुसार सही मूल्य की जानकारी होनी चाहिए।
बिल लेना भी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में यह प्रमाण के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा ग्राहकों को मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्कों की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लेनी चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल विश्वसनीय और प्रतिष्ठित ज्वैलर्स से ही खरीदारी की जानी चाहिए ताकि गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर किसी प्रकार की समस्या न हो।
असली चांदी की पहचान कैसे करेंचांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बाजार में नकली या मिलावटी धातु की संभावना को देखते हुए ग्राहकों को कुछ बुनियादी परीक्षणों की जानकारी होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार चुंबक परीक्षण सबसे आसान तरीकों में से एक है। शुद्ध चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। यदि कोई वस्तु चुंबक की ओर आकर्षित होती है तो उसमें अन्य धातुओं की मिलावट होने की संभावना रहती है।
बर्फ परीक्षण भी काफी लोकप्रिय है। चांदी ऊष्मा की उत्कृष्ट संवाहक होती है, इसलिए उस पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में अधिक तेजी से पिघलती है। इसके अतिरिक्त वास्तविक चांदी में किसी प्रकार की तीखी गंध नहीं होती, जबकि मिलावटी धातुओं में तांबे जैसी गंध महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहकों को हमेशा प्रमाणित विक्रेताओं से खरीदारी करनी चाहिए और जहां संभव हो, शुद्धता प्रमाणपत्र अवश्य प्राप्त करना चाहिए।
खरीदारों और निवेशकों के लिए क्या है संदेशसोना और चांदी में आई हालिया गिरावट ने बाजार को नई दिशा दी है। जहां निवेशकों के लिए यह अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का समय है, वहीं आम ग्राहकों के लिए कम कीमतों पर खरीदारी का अवसर बन सकता है। विशेष रूप से विवाह सीजन और त्योहारों की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए वर्तमान कीमतें राहत देने वाली साबित हो सकती हैं।
हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को देखकर निवेश संबंधी निर्णय नहीं लेने चाहिए। सोना और चांदी दीर्घकालिक निवेश की श्रेणी में आते हैं और इनमें निवेश करते समय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों जैसे कारकों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वर्ष 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद सोना और चांदी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। आने वाले सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां यह तय करेंगी कि यह गिरावट अस्थायी है या बहुमूल्य धातुओं के बाजार में किसी बड़े बदलाव का संकेत।
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