Nirjala Ekadashi 2026: क्या होता है हरि वासर? जानें निर्जला एकादशी के व्रत पारण में क्यों रखा जाता है इसका ध्यान
TV9 Bharatvarsh June 24, 2026 07:43 PM

Nirjala Ekadashi 2026: साल में 24 और अधिकमास के समय में 26 एकादशी व्रत रखे जाते हैं, लेकिन साल की सबसे बड़ी एकादशी, निर्जला एकादशी मानी जाती है. ये एकादशी सभी एकादशी व्रतों में सबसे अधिक पुण्यदायी मानी जाती है. धार्मिक और पौराणिक मान्यता है कि ये व्रत स्वयं पांडु पुत्र भीम ने रखा था, ताकि वो सभी एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त कर सकें. निर्जला एकदशी का व्रत अन्य सभी एकादशी के व्रतों से कठिन होता है. इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून यानी कल रखा जाएगा. निर्जला एकादशी का उपवास बिना जल ग्रहण किए रखा जाता है.

मान्यता है कि इस व्रत को पूर्ण करने पर अन्य सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है. साथ ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा से मृत्यु के बाद मोक्ष और वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है. हालांकि, व्रत का पारण न करने से साधक का व्रत सफल नहीं माना जाता है, इसलिए अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है. पारण करते समय हरि वासर की अवधि का खास ध्यान की सलाह दी जाती है. हरि वासर के दौरान व्रत का पारण करना पूरी तरह से वर्जित माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या है हरि वासर?

क्या होता है हरि वासर?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वादशी तिथि के पहले एक-चौथाई समय को हरि वासर कहते हैं. ये वो समय माना जाता है, जिसमें निर्जला एकादशी के व्रत का पारण भूलकर भी नहीं किया जाता है. अगर इसको आसान शब्दों में कहा जाए तो 24 घंटे की कुल तिथि में द्वादशी तिथि के जो पहले छह घंटे होते हैं, उनको हरि वासर कहा जाता है.

पारण में क्यों रखा जाता है इसका ध्यान?

निर्जला एकादशी बहुत पुण्यदायी व्रत होता है, लेकिन अगर इसमें अगर व्रत का पारण करते समय हरि वास का ध्यान नहीं रखा जाए तो इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. मान्यता है कि अगर हरि वासर के दौरान निर्जला एकादशी के व्रत का पारण कर लिया गया तो व्रत निष्फल हो जाता है. यही कारण है कि इस व्रत के पारण से पहले हरि वासर का खास ध्यान रखने के लिए कहा जाता है.

निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण का समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी के व्रत का पारण का शुभ मुहूर्त 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक रहने वाला है. इस समय भक्त अपना उपवास खोल सकते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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