अमेरिका और भारत एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ‘बेहद करीब’ हैं. यह समझौता 1.4 अरब आबादी वाले भारतीय बाजार को पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी शर्तों पर अमेरिकी वस्तुओं के लिए खोलेगा.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय में उप सहायक मंत्री बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने अमेरिकी संसद परिसर ‘कैपिटल हिल’ में फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मंगलवार (23 जून ) को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ‘परिणाम-आधारित’ संबंध को आगे बढ़ा रहे हैं.
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समझौते के करीब
मॉरिसन ने इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप और मोदी के बीच बनी सहमति के बाद शुरू हुई व्यापार वार्ताओं का उल्लेख किया और कहा, ‘हम इस रिश्ते को बैठकों से नहीं, बल्कि परिणामों से माप रहे हैं.’ मॉरिसन ने कहा, ‘जब हमने फरवरी 2026 में व्यापार पर विचार किया तो हमने इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की मंशा जताई थी. हम अब इसके बहुत, बहुत करीब हैं.’’उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत के 1.4 अरब लोगों के बाजार को अमेरिकी वस्तुओं के लिए पारस्परिक एवं लाभकारी शर्तों पर खोलेगा.
140 करोड़ का बाजार
मॉरिसन ने कहा, प्रशासन ‘मिशन 500’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को हासिल करना है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर भारत दौरे पर हैं और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच जारी यह वार्ता वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
इनपुट- भाषा
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