क्यों करोड़ों की कारों में भी सेफ्टी फीचर्स नहीं संभाल पाते हादसे, जानिए क्या है वजह?
क़मरजहां June 25, 2026 03:12 PM

मॉडर्न कारें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सेफ मानी जाती हैं. इनमें एयरबैग और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसे कई सेफ्टी फीचर्स दिए जाते हैं. इन तकनीकों की वजह से लोगों को लगता है कि नई कारें हर तरह के हादसे में यात्रियों की पूरी सुरक्षा कर सकती हैं. लेकिन हाल ही में एक तेज रफ्तार BMW के एक्सीडेंट के बाद सवाल खड़ा हे गया कि क्या मॉडर्न कारों के सेफ्टी फीचर्स हर हालत में जान बचा सकते हैं? एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी कार की सेफ्टी की अपनी सीमाएं होती हैं और तेज रफ्तार पर ये सिस्टम भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पाते.

कार कंपनियां अपनी गाड़ियों को कई तरह के क्रैश टेस्ट से गुजारती हैं. इन टेस्टिंग में कारों की मजबूती, एयरबैग और यात्रियों की सुरक्षा को परखा जाता है. हालांकि ये टेस्ट एक नॉर्मल स्पीड में किए जाते हैं. जब कोई गाड़ी बहुत ज्यादा रफ्तार से दुर्घटनाग्रस्त होती है तो टक्कर के दौरान पैदा होने वाली एनर्डी कई गुना बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में कार की बॉडी, एयरबैग और अन्य सेफ्टी फीचर्स पर कहीं ज्यादा दबाव पड़ सकता है.

स्पीड से बड़ा जोखिम कोई नहीं

किसी भी एक्सीडेंट में स्पीड सबसे बड़ा जोखिम होती है. उदाहरण के लिए, अगर गाड़ी की स्पीड दोगुनी हो जाती है, तो टक्कर के समय उत्पन्न होने वाली एनर्जी केवल दोगुनी नहीं बल्कि कई गुना बढ़ जाती है. यही वजह है कि 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर होने वाली दुर्घटना और 120-150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर होने वाली दुर्घटना के परिणामों में बहुत बड़ा अंतर होता है. तेज स्पीड पर कार के सुरक्षा फीचर्स यात्रियों को कुछ हद तक सुरक्षा तो दे सकते हैं, लेकिन गंभीर चोटों या मौत के खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते.

एयरबैग को अक्सर सबसे जरूरी सुरक्षा फीचर माना जाता है, लेकिन उनकी भी एक सीमा होती है. एयरबैग का काम टक्कर के समय सिर और शरीर को स्टीयरिंग, डैशबोर्ड या अन्य कठोर हिस्सों से टकराने से बचाना है. अगर दुर्घटना बहुत अधिक रफ्तार पर होती है या टक्कर का प्रभाव ज्यादा गंभीर होता है, तो केवल एयरबैग यात्रियों को पूरी तरह सेफ नहीं रख सकते. यही कारण है कि एयरबैग के साथ सीट बेल्ट का यूज भी बेहद जरूरी माना जाता है.

नॉर्मल स्पीड में ही काम आती हैं चीजें

मॉडर्न कारों में मिलने वाले ADAS फीचर्स जैसे ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट और कोलिजन वार्निंग सिस्टम एक्सीडेंट्स को रोकने में मदद करते हैं. हालांकि ये तकनीकें भी तभी प्रभावी होती हैं जब कार नॉर्मल स्पीड चल रही हो. ज्यादा रफ्तार पर ड्राइवर के पास रिएक्शन का समय कम हो जाता है और कई बार इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी स्थिति को संभाल नहीं पाते.

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