अब पश्चिम बंगाल में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश करने की तैयारी चल रही है. शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार जारी बजट सत्र के दौरान सोमवार को विधानसभा में UCC बिल पेश करने जा रही है. सरकार का यह कदम उसके 6 महीने में लागू करने के वादे को समय से पहले पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
राज्य कैबिनेट से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि यह फैसला गुरुवार शाम विधानसभा में हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में लिया गया. ऐसा कहा जा रहा है कि इस कदम से राज्य में कानूनी और सामाजिक नीति में बड़ा बदलाव आएगा, क्योंकि BJP यूनिफॉर्म सिविल कोड को अपने मुख्य गवर्नेंस सुधारों में से एक के तौर पर पेश कर रही है. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि अधिकारी सरकार अपने इस बिल में असम सरकार की तर्ज पर प्रस्ताव तैयार करेगी या फिर कुछ अपना अलग करेगी.
चुनाव के दौरान BJP ने किया था वादापिछले महीने खत्म हुए विधानसभा चुनावों से पहले, पार्टी ने सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर UCC लागू करने का वादा किया था. इसी साल अप्रैल में BJP का चुनावी घोषणापत्र या ‘संकल्प पत्र’ जारी करते समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस वादे पर खासा जोर दिया था. पश्चिम बंगाल में यूसीसी बिल आने से पहले उत्तराखंड, गुजरात, असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने या तो अपने यहां लागू कर दिया है या फिर इस पर काम कर रहे हैं. उत्तराखंड, गुजरात और असम अब तक यूसीसी लागू करने वाले 3 राज्य हैं.
शुभेंदु अधिकारी कैबिनेट के एक मंत्री ने कहा, “अब बंगाल भी BJP शासित अन्य राज्यों की तर्ज पर इसे लागू करेगा, जैसा कि हमने विधानसभा चुनावों से पहले ऐसा करने वादा किया था.” प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड का मकसद इसमें सभी नागरिकों को शामिल करना होगा, चाहे वो किसी भी धर्म का हो- शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों के लिए एक समान नागरिक कानून बनाना जरूरी है. इसमें बहुविवाह और तीन तलाक जैसी प्रथा पर भी रोक लगाने और धर्म-आधारित पर्सनल लॉ को बदलने का प्रस्ताव भी है.
समान कानून तुष्टीकरण नहींः अमित शाहराज्य में चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने तर्क दिया था, “क्या हर भारतीय नागरिक के लिए एक समान कानून होना तुष्टीकरण करना होता है, या तुष्टीकरण तब होता है जब एक नागरिक को चार बार शादी करने की इजाजत मिले और दूसरा सिर्फ एक बार ही शादी कर सके?” इस दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर एक समुदाय के पक्ष में नीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था.
यूसीसी के पक्ष में एक ओर BJP नेताओं का कहना है कि एक समान कानूनी ढांचा कानून के सामने समानता सुनिश्चित करेगा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा, तो वहीं तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि पर्सनल लॉ धार्मिक आजादी और सामुदायिक पहचान से गहराई से जुड़े होते हैं.
2 अन्य कानूनों में संशोधन की तैयारीमाना जा रहा है कि बीजेपी सरकार UCC बिल के अलावा, 2 और कानून भी पेश कर सकती है जिनका मकसद सार्वजनिक अव्यवस्था, तोड़-फोड़ और पुलिसकर्मियों तथा सरकारी कर्मचारियों पर हमलों से निपटना है. इस प्रस्ताव में ‘वेस्ट बंगाल मैंटनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट, 1972 (West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972) में संशोधन करने की बात कही गई है.
यह कानून दंगे, आगजनी, लूटपाट और विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल जैसे अपराधों से संबंधित है. जबकि दूसरा प्रस्ताव, ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज़ बिल, 2026’ नाम का एक नया कानून है. इसका मकसद सार्वजनिक सुरक्षा के उपायों को मजबूत करना और संगठित असामाजिक गतिविधियों से निपटना है.
अधिकारियों का कहना है कि ये बिल उन कई घटनाओं को देखते हुए बनाए गए हैं, जिनमें कई हिंसक भीड़ ने पुलिस स्टेशनों और सरकारी दफ्तरों को निशाना बनाया. प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे अपराधों को ‘संज्ञेय’ (cognisable) और ‘गैर-जमानती’ (non-bailable) की श्रेणी में रखे जाने की उम्मीद है.