Smartphone Tips: जो भी नए फोन लॉन्च हो रहे हैं, उनमें से ज्यादातर स्मार्टफोन्स में आप लोगों को वर्चुअल रैम फीचर मिल जाएगा. लॉन्च के समय कंपनियां इस फीचर को भी हाइलाइट करती हैं जिससे कि ग्राहकों को पता चले कि जो नया फोन मार्केट में आया है उसमें वर्चुअल रैम फीचर भी दिया गया है. इसे डायनामिक रैम नाम से भी जाना जाता है. यहां समझने वाली बात ये है कि वर्चुअल रैम है क्या और इसका फायदा क्या है? कंपनियां वर्चुअल रैम के लिए फोन में अलग से कोई फिजिकल चिप नहीं लगाती हैं, बल्कि ये एक सॉफ्टवेयर बेस्ड तकनीक है.
फोन के रिटेल बॉक्स में लिखा दिख जाता है कि फोन 8GB के साथ 8GB या 12GB के साथ 12GB वर्चुअल रैम के साथ आता है. इसका मतलब क्या है? आसान भाषा में अगर समझें तो मान लीजिए आपने 8 जीबी वाला फोन खरीदा जो 8 जीबी वर्चुअल रैम के साथ आता है तो ये फीचर जब आप यूज करेंगे तो फोन आपके फोन में खाली पड़ी स्टोरेज का इस्तेमाल करेगा और आपको इसके बदले एक्स्ट्रा रैम दे देगा.
Virtual RAM कैसे करती है काम?ये फीचर अब बजट स्मार्टफोन्स से लेकर फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स तक में मिलने लगा है. एक बात जो यहां गौर करने वाली है वह यह है कि अगर आपके फोन में खाली स्पेस यानी स्टोरेज नहीं है, तो ये फीचर हो सकता है कि आपके लिए काम न करे क्योंकि इस फीचर को काम करने के लिए फोन की खाली स्टोरेज की जरूरत पड़ती है.
Virtual RAM के फायदेवर्चुअल रैम की मदद से रैम को बढ़ाने का पहला फायदा तो ये है कि फोन में मल्टीटास्किंग बेहतर हो जाती है. दूसरा फायदा ये है कि जब एक्स्ट्रा रैम मिलती है तो ऐप तेजी से लोड हो सकते हैं. तीसरा फायदा ये है कि रैम कम होने पर कई बार ऐप्स क्रैश होने लगते हैं और अचानक से बंद हो जाते हैं. ज्यादा रैम मिलने पर ऐप क्रैश की समस्या भी दूर हो सकती है.
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